नयागांव। एक ओर जहां लोग कोरोना महामारी से संक्रमित हो रहे हैं। वहीं, लोगों में मानसिक बीमारियां भी बढ़ रही हैं। क्योंकि भारतीय समाज में जहां हम सामाजिक जीवन की बात करते थे, वहीं आज हम सामाजिक दूरी की बात कर रहे हैैं। कुछ ऐसे ही शब्द, जैसे कि आइसोलेशन, क्वारंटीन, लॉकडाउन आदि जो पहले आम व्यक्ति ने कभी सुने भी नहीं थे। यह शब्द इस बीमारी के साथ नए जुड़े हैं। इस कारण लोगों के अंदर मानसिक तनाव की स्थिति पैदा हो रही है। यह जानकारी डॉ. कृष्ण कुमार सोनी, असिस्टेंट प्रोफेसर (क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट) मनो चिकित्सा विभाग पीजीआई ने दी।
उन्होंने बताया कि कोविड-19 के संक्रमण से ठीक हुए कुछ मरीजों में भी मानसिक बदलाव देखे जा रहे हैं। इसका मुख्य कारण मरीज का लंबे समय तक आइसोलेशन में रहना है और अब लोगों का काम करने का तरीका भी बदल गया। लोग घरों से काम कर रहे हैं, इस कारण इलेक्ट्रिक उपकरण पर निर्भरता ज्यादा बढ़ गई है। लोग घरों में ही ज्यादा समय बिता रहे हैं। वहीं, बच्चे भी आजकल ऑनलाइन क्लास लगा रहे हैं। इन सभी कारणों से लोगों में मानसिक बीमारी होने का ज्यादा खतरा है।
मानसिक बीमारियों से बचाव के लिए हमें कोविड-19 महामारी के दौर में सामाजिक दूरी अपनानी चाहिए न कि भावनात्मक दूरी। हमें भावनात्मक रूप से एक दूसरे के साथ जुड़े रहना चाहिए। हम अपने खानपान में थोड़ा सा बदलाव लाकर इन समस्याओं से बच सकते हैं। साथ में हमें अपनी दिनचर्या में भी बदलाव करना पड़ेगा जैसे सुबह कुछ समय के लिए व्यायाम करना चाहिए। क्योंकि कोरोना महामारी में हम घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। इस कारण घर बैठे-बैठे तनाव की स्थिति पैदा हो जाती है। तनाव को कम करने के लिए हमें व्यायाम, मनोरंजन और सभी परिवार जनों का आपस में बातचीत करना ही उपाय है।
वहीं, डॉ. सोनी ने बताया कि पीजीआई चंडीगढ़ ने फिजिकल ओपीडी बंद की हुई है। लेकिन कोई भी मरीज फोन पर या ऑनलाइन जानकारी ले सकता है। ऑनलाइन ही मरीज का एसेसमेंट किया जाता है और मरीज का जरूरत के हिसाब से उपचार भी किया जाता है।
मानसिक बीमारी के शुरूआती लक्षण
शुरुआती दौर में नींद न आना, भूख कम लगना, काम या पढ़ाई में मन न लगना, उदासी रहना, घबराहट जैसे आदि लक्षण मानसिक बीमारी होने पर दिखाई देते हैं अगर किसी भी व्यक्ति में यह लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत मनोचिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।
कोविड-19 के दौर में हमें एबीसी पर काम करना चाहिए
ए - अवेयरनेस.. मतलब बीमारी के बारे में हमें पूरी जानकारी होनी चाहिए।
बी- बिलीव.. मतलब हमें अपने डॉक्टर एवं दूसरे स्टाफ पर भरोसा होना चाहि।
सी- केयर.. मतलब इन सबके बाद हमें अपनी खुद की देखभाल करनी चाहिए।