डेराबस्सी। पंजाब की अमीर काउंसिलों में शामिल डेराबस्सी की क्लास-ए नगर काउंसिल में बेघर और बाहरी यात्रियों के रहने के लिए कोई भी रात काटने के लिए प्रबंध नहीं हैं। जबकि बड़े से बड़े शहर और छोटे से छोटे गांव में भी ऐसे यात्रियों और बेघर लोगों के लिए रात काटने का प्रबंध होता है। जिसको रैन बसेरा का नाम दिया जाता है और यहीं पर रुकने वाले लोगों को मुफ्त में रात काटने के लिए छत और बिस्तर दिया जाता है। लेकिन डेराबस्सी में कोई भी रैन बसेरा नहीं होने के कारण बेघर लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कड़ाके की ठंड में रैन बसेरा न होने के कारण ऐसे लोगों के लिए जान का खतना बना हुआ है। लंबे समय से शहर निवासी यहां रैन बसेरा बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन काउंसिल अधिकारी बहाने बाजी करके समय निकाल रहे हैं।
इस संबंधी पिछले लंबे समय से मांग उठा रहे पूर्व पार्षद मास्टर विपिन थम्मन ने कहा कि पंजाब के छोटे से छोटे शहर में भी बेघर और बाहरी यात्रियों के रुकने के लिए रैन बसेरा स्थापित किया होता है। गांव में तो विशेष तौर पर धर्मशालाओं में रैन बसेरा स्थापित किया जाता है। लेकिन डेराबस्सी ऐसा कस्बा है जहां की काउंसिल की आमदन करोड़ों रुपये वार्षिक है। लेकिन यहां पर रैन बसेरे का कोई प्रबंध नहीं है। जो शहर के लिए बड़ी शर्मनाक बात है। जबकि यह शहर हाईवे पर स्थित है। यहां काफी बड़ा औद्योगिक क्षेत्र भी है। जहां बड़ी संख्या में प्रवासी लोगों का आना-जाना रहता है।
जानकारी के मुताबिक किसी समय पर काउंसिल की तरफ से यहां की तहसील रोड पर बस स्टैंड के पीछे रैन बसेरे का निर्माण किया गया था। जहां किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को रात काटने के लिए कमरों और बिस्तरों का प्रबंध किया हुआ था। लेकिन खाली इमारत होने के कारण इस पर पुलिस ने कब्जा कर लिया। अब इसे पुलिस कर्मियों ने अपनी रिहायश बना लिया है। इसके बाद काउंसिल की तरफ से दावा किया गया था कि वह बरवाला रोड पर सैनी भवन में अस्थायी तौर पर रैन बसेरा स्थापित करेंगे। जिसमें कोई भी यात्री यहां आकर रात काट सकता है। लेकिन बीते दिनों काउंसिल ने यहां अपना दफ्तर अस्थायी तौर पर तबदील कर लिया है। इस समय डेराबस्सी में बाहरी यात्रियों और बेघरे लोगों के रहने के लिए या रात काटने के लिए कोई प्रबंध नहीं है। ठंड में रैन बसेरा बेघर लोगों के लिए बड़ी सुविधा साबित होता है। इसके अलावा शहर में कुछ भिखारी और मानसिक तौर पर परेशान लोग घूमते रहते हैं। इनके पास ठंड में रात काटने के लिए कोई प्रबंध नहीं हैं। यह लोग खुले में या फ्लाईओवर के नीचे रात काटने के लिए मजबूर हैं। बिना छत के कड़ाके की ठंड के कारण बीते दिनों में कई मानसिक तौर पर परेशान या भिखारियों की मौत हो चुकी है। लेकिन इसके बावजूद काउंसिल इस तरफ ध्यान नहीं दे रही है।
बात करने पर नगर काउंसिल के प्रधान रणजीत सिंह रैडी ने कहा कि लंबे समय से रैन बसेरा स्थापित करने के लिए विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक पक्के तौर पर रैन बसेरे का निर्माण नहीं होता तब तक ठंड में रात काटने के लिए यहां के सरकारी सामुदायिक केेंद्र में कुछ बिस्तरे लगाकर अस्थायी तौर पर प्रबंध किया जाएगा।