मोहाली स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने शनिवार को 1993 में दो युवकों के फर्जी एनकाउंटर में हत्या करने के मामले में पंजाब पुलिस के तीन अधिकारियों को दोषी करार देकर सजा सुनाया है। जज बलजिंदर सिंह सरा ने रावलपिंडी थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर मनजीत सिंह को आठ साल, फगवाड़ा सिटी थाने के तत्कालीन एसएचओ गुरमेज सिंह को आठ साल की सजा व जुर्माना और एएसआई करमजीत सिंह को तीन साल की सजा सुनाया है। मामले में सिपाही कश्मीर सिंह और हरजीत सिंह को बरी कर दिया है।
सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार 27 मार्च 1993 को सुबह करीब 8:30 बजे करमजीत सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने रावलपिंडी गांव से पलविंदर सिंह उर्फ पप्पू को उसके घर से उठा लिया। उसी दिन मनजीत सिंह ने बलबीर सिंह को धड्डे गांव से उठाया। दोनों को अवैध हिरासत में रखा गया और 3 अप्रैल 1993 को चोरी और डकैती के झूठे केस में फगवाड़ा सिटी थाने में गिरफ्तार दिखाया। पुलिस ने उनके पास से स्कूटर और सोने की अंगूठी की बरामदगी भी दिखाई। इसके कुछ घंटों बाद पुलिस ने दावा किया कि दोनों युवक हथियारों की बरामदगी के दौरान पुलिस की गिरफ्त से भाग निकले और उनके खिलाफ 225 आईपीसी के तहत एक और मामला दर्ज किया गया। मात्र दो दिन बाद 5 अप्रैल 1993 को सुल्तानपुर लोधी पुलिस ने एक मुठभेड़ में दोनों को मार गिराया। पीड़ितों के परिवारों को उनकी मौत की जानकारी तक नहीं दी गई और शवों को लावारिस बताकर जला दिया गया।
जांच में फर्जी निकला पूरा एनकाउंटर
1995 में पलविंदर सिंह के पिता दर्शन सिंह ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने न्यायिक जांच के आदेश दिए और 2003 में सीजेएम कपूरथला की रिपोर्ट में मुठभेड़ को फर्जी बताया। इसके आधार पर 2005 में सीबीआई जांच के आदेश हुए और 2012 में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई। गवाहों के बयानों और सह-आरोपियों के कबूलनामे के आधार पर कोर्ट ने माना कि पूरा एनकाउंटर फर्जी था। सुप्रीम कोर्ट ने भी पंजाब सरकार को स्वतंत्र जांच का विरोध करने पर फटकार लगाई थी।