मोहाली। ट्राइसिटी समेत उत्तरी भारत के रीढ़ के मरीज सेक्टर-70 स्थित स्पाइनल इंजरी सेंटर में इलाज कराने आते हैं। उन्हें अब इलाज के लिए बनने वाले कार्ड या फीस भरने के लिए कतार में नहीं लगना पड़ेगा। संस्थान ने यह सारी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी है।
फोन या कंप्यूटर से ऑनलाइन कार्ड बनाते समय साथ में ही यह पता चल जाएगा कि डॉक्टर द्वारा उन्हें कब चेक किया जाएगा। मरीजों को अब लंबा इंतजार नहीं करना पड़ रहा है क्योंकि संस्थान के निदेशक डॉ. राज बहादुर रोज मरीजों को देख रहे हैं। संस्थान का दावा है कि मरीजों को बेहतर इलाज समय से मुहैया करवाने के चलते ही सारी प्रक्रिया की जा रही है।
स्पाइनल इंजरी सेंटर साल 2006 से चल रहा है। हजारों मरीजों को इस संस्थान से नया जीवन मिला है। पहले मरीजों के कार्ड संस्थान में ही बनते थे। वहीं संस्थान के निदेशक मात्र एक दिन शनिवार को मरीजों को देखते थे। ऐसे में कई राज्यों से मरीज व उनके तीमारदार निदेशक से अप्वाइंटमेंट लेने के लिए शुक्रवार से ही कतार में लग जाते थे।
क्यूआर कोड स्कैन करके या वेबसाइट पर जाकर करना होगा आवेदन
लोगों को अब क्यूआर कोड स्कैन करके या फिर संस्थान की वेबसाइट https://rsicmohali.com/ पर जाकर ओपीडी या अप्वाइंटमेंट के बॉक्स पर क्लिक करना होगा। वहां पर दिए गए फार्म को भरना होगा। इसमें उन्हें अपनी सारी जानकारी व फोन नंबर भरना होगा। इसके बाद उनके मोबाइल पर एक कोड आएगा। साथ ही उनकी ओपीडी की अप्वाइंटमेंट का समय और दिन भी लिखेगा। यह कोड उन्हें संस्थान में जाकर बताना होगा। इसके बाद उन्हें टोकन नंबर जारी हो जाएगा। इसके लिए शुल्क 50 रुपये तय किया गया है। इतना ही नहीं अगर कोई व्यक्ति अपनी अप्वाइंटमेंट रद्द करना चाहता है तो उसके पास यह सुविधा भी मौजूद रहेगी। इसके अलावा ऑनलाइन यह भी देख पाएंगे कि आपकी बारी कब तक आएगी।
रोज 50 मरीजों को खुद देखते हैं निदेशक
संस्थान के निदेशक डॉ. राज बहादुर रोज कम से कम 50 मरीजों को देखते हैं। इससे लोगों का काफी फायदा हुआ है। अब करीब दो दिन में मरीजों का नंबर आने लग गया है। स्पाइन और ऑर्थो से जुड़ी कंसल्टेंसी सेवाओं के लिए सोमवार से शुक्रवार तक सुबह 9 से 12 बजे तक का समय है। वहीं शनिवार को सुबह नौ से शाम पांच बजे तक रहता है।
अस्पताल 16 साल से कर रहा इलाज
यह अस्पताल 16 सालों से चल रहा है। अस्पताल में करीब 50 कमरे और 100 डॉक्टर हैं। इसमें सेना के जवान तक शामिल है। सेंटर में हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड आदि से मरीज आते हैं।