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Mohali News: तीन साल पहले पास हुआ प्रस्ताव, निगम को अभी तक नहीं मिला गमाडा का क्षेत्र

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मोहाली। ग्रेटर मोहाली एरिया डवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा बसाए गए सेक्टरों को बेहतर बनाने और सुविधाएं देने के लिए निगम द्वारा वर्ष 2021 में हाउस पास किए गए प्रस्ताव पर अब तक मुहर नहीं लग सकी है। शहर के बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करने के लिए नगर निगम द्वारा वर्ष 2021 में यह प्रस्ताव हाउस में पास कर दिया था और उसको लोकल अर्बन बाडी के ध्यानार्थ भेज दिया था।
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इसमें टीडीआई के सेक्टर, जेएलपीएल के चार सेक्टर तथा तीन गांवों को नगर निगम में शामिल करने का प्रस्ताव था। इसमें शहर की सीमाओं को बढ़ाने के साथ-साथ पब्लिक हेल्थ का सारा काम नगर निगम द्वारा गमाडा से ट्रांसफर करवाने के प्रस्ताव पर भी इस मीटिंग में मोहर लगा दी गई थी।

डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह बेदी ने बताया कि जो कैबिनेट मंत्री के पास लोगों की शहर से जुड़ने को लेकर मांग आ रही थी उसके तहत एयरपोर्ट रोड के साथ जुड़े टीडीआई के सेक्टर, गांव बरियाली, बलौंगी, बड़माजरा और सेक्टर-91, 92, 82, 66ए यह सेक्टर एयरपोर्ट रोड पर स्थित है। इनको जेएलपीएल की ओर से विकसित किए गए हैं।
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इन सेक्टरों में रहने वाले लोगों को नगर निगम की सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए यह कदम उठाया जाना था। इन एरिया में रहने वाले करीब अस्सी हजार लोगों को अच्छी सुविधाएं मिलने की उम्मीद थी।
मोहाली नगर निगम के मेयर अमरजीत सिंह सिद्धू ने कहा कि तीन वर्ष पहले हाउस की मीटिंग में इस प्रस्ताव को इसी वजह से पास किया गया था कि इन इलाकों का विकास हो सके। उन्होंने कहा कि अब तक प्रस्ताव को मंजूरी नहीं प्रदान की गई यह बात नहीं समझ में आई। अमरजीत सिंह सिद्धू ने कहा कि गमाडा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदान करता है और वहां पर सुविधाओं को देना निगम का काम है। इसके लिए जरूरी है कि यह प्रस्ताव मंजूर किया जाए।

अब गरमाया सात गांव को निगम में शामिल करने का मुद्दा

वहीं, पंचायत चुनाव नजदीक आते देख मोहाली शहर के साथ सटे सात गांवों को नगर निगम सीमा में शामिल करने का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। इन गांवों को नगर निगम में शामिल करने का मुद्दा पिछले चार सालों से लटका पड़ा है। साल 2021 में में नगर निगम की हाउस मीटिंग में इस संबंधी प्रस्ताव पारित किया था। पंचायत चुनाव नजदीक आते ही यह मामला एक बार फिर गरमा गया है।


2015 में निर्धारित की गई थी नगर निगम की सीमा
नगर परिषद को भंग कर 2011 में नगर निगम का गठन किया गया था। उस दौरान नगर परिषद की सीमाओं के अनुसार ही निगम बनाया गया था। वर्ष 2015 में हुए निगम के पहले चुनाव के लिए शहर की सीमाओं को बढ़ाया गया था। उस समय बलौंगी को शहर में शामिल करने की मांग उठी थी पर अकाली सरकार के दौरान ऐसा नहीं हुआ।
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