चंडीगढ़। सेक्टर-18 के टैगोर थिएटर के मिनी ऑडिटोरियम में शनिवार को नाटक एक सामने वाली खिड़की में का मंचन किया गया। नाटक में दिखाया गया कि व्यक्ति जीवन में अपनी इच्छानुसार सब कुछ नहीं कर पाता। उसके कार्यकलाप उसके संबंधियों, समाज व परिस्थितियों से भी प्रभावित होते हैं। नाटक में हास्य का पुट भी भरपूर रहा। गीत भी पेश किए गए।
नाटक में दिखाया गया कि एक घर है। एक घर में 70 वर्ष के बुजुर्ग है जो घर चला रहे हैं। सामने एक पीजी है जो वार्डन चलाती है। बुजुर्ग का थिएटर ग्रुप है। उस थिएटर को वह अपने लड़के से चलवाता है। बुजुर्ग के घर में कोई औरत नहीं है। बुजुर्ग और वार्डन में नहीं पटती है और उनके बीच हमेशा झगड़ा होता रहता है। बुजुर्ग का एक छोटा पोता है। उस पर वह दबाव डालता है कि वह किसी लड़की को पटाए ताकि घर का किस्मत खुले। लेकिन उसके पोते को यह बात पसंद नहीं है। नाटक में यह भी दिखाया गया है कि कुछ लड़कियां लड़कों से बदला लेने की भावना रखती हैं। वह लड़कों को अपने दबाव में रखना चाहती हैं, इसके लिए वे तरह-तरह के हथकंडे अपनाती हैं।
नाटक का मंचन शून्य ग्रुप के कलाकारों ने किया। निर्देशन सार्थक सिंह ने किया। सार्थक सिंह ने बताया कि इस नाटक का विचार एक फिल्म देखने के बाद आया।