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हमारे गांव की जमीनों पर है नगर परिषद नयागांव की नजर : सरपंच

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नयागांव। नगर परिषद नयागांव का दायरा बढ़ाने और आसपास के गांवों को शामिल करने के प्रस्ताव का ग्रामीणों ने कड़ा विरोध किया है। हाल ही में हुई नगर परिषद की विशेष बैठक में मौजूदा मास्टर प्लान की अवधि 2031 तक बढ़ाने और करोरां, नाडा, मसौल, पडछ, शिव नगर, टांडा-टांडी, काने का बाड़ा सहित अन्य गांवों को सीमा में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया था। परिषद का कहना था कि इससे अवैध कब्जे और अनियोजित निर्माण पर रोक लगेगी और गांवों को बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी।
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लेकिन गांवों के सरपंचों ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए एसडीएम खरड़ को ज्ञापन सौंपा। सरपंचों ने कहा कि नयागांव के 21 वार्डों में ही लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं, ऐसे में नगर परिषद अन्य गांवों का विकास कैसे करेगी। टांडा के सरपंच सतनाम सिंह ने कहा कि परिषद की नजर गांवों की जमीनों पर है, विकास महज बहाना है। बड़ी करोरां के सरपंच पति जोगाराम ने कहा कि छोटे क्षेत्र में पंचायतें बेहतर विकास कर सकती हैं, जबकि नगर परिषद में शामिल होने से गांव पिछड़ जाएंगे।
मासोल के सरपंच बिंदर सिंह ने कहा कि हमारा इलाका पहले ही पिछड़ा हुआ है, परिषद में शामिल होने के बाद तो हमारी कोई सुनवाई तक नहीं होगी। सरपंचों का कहना है कि पंचायत राज व्यवस्था में उन्हें कुछ हद तक विकास कार्य हो जाते हैं, लेकिन नगर परिषद के तहत आने पर लोगों को बिजली, पानी और घर के नक्शे पास करवाने तक के लिए बार-बार एनओसी लेनी पड़ेगी। इस कारण ग्रामीणों ने प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया।
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