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निकाय विभाग को भेजी प्रोसीडिंग में मेयर का पलड़ा भारी

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मोहाली। नगर निगम की 29 जुलाई को हुई बैठक में वित्त एंड अनुबंध कमेटी (एफएंडसीसी) के मुद्दे को लेकर हुए हंगामे व कमेटी के खिलाफ विरोधी पार्षदों द्वारा दिए गए पत्र के बावजूद भी मेयर का पलड़ा भारी है। मीटिंग के बाद जो प्रोसीडिंग स्थानीय निकाय विभाग को भेजी है, उसमें विरोधी दल के एतराज खारिज कर दिए हैं। साथ ही सर्वसम्मति से पास किए प्रस्ताव मंजूरी के लिए भेजे हैं जबकि दूसरे दल के पार्षदों कहना है कि वे जंग जारी रखेंगे।
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29 जुलाई को हुई हाउस की मीटिंग में जैसे ही वित्त एंड अनुबंध कमेटी द्वारा गत समय में पास किए प्रस्ताव मंजूरी के लिए लाए गए तो हंगामा हो गया था। कांग्रेस व आजाद ग्रुप के कुछ पार्षदों ने वित्त एंड अनुबंध कमेटी पर मनमानी के आरोप लगाए थे। उनकी दलील थी कि कमेटी केवल चुनिंदा पार्षदों के काम करती है जबकि आम पार्षदों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इस दौरान पूर्व डिप्टी मेयर मनजीत सिंह सेठी की अगुवाई में 26 पार्षदों ने कमेटी के खिलाफ हस्ताक्षर कर पत्र विधायक कुलवंत सिंह, मेयर अमरजीत सिंह जीती सिद्धू व कमिश्नर नवजोत कौर को सौंपा था। इसमें मांग की गई थी कि कमेटी को दी गई ताकतों को रद्द किया जाए। विरोधी दल ने भाजपा मेयर के पास बहुमत न होने की बात कहने की बात कही थी। साथ ही अपने पास बहुमत होने का दावा किया था।
मीटिंग में हाजिर 47 मेंबरों में 26 मेंबरों के हस्ताक्षर वाला एक पत्र बाद में जारी किया गया। साथ ही कहा था कि विरोधी दल ने कुछ सदस्यों को गुमराह करके उनके हस्ताक्षर करवाए हैं लेकिन वे सभी मेयर के साथ हैं। वहीं अब जो प्रोसीडिंग निकाय विभाग को भेजी गई। उसमें कहा गया है कि उक्त प्रस्ताव पर पार्षद सुखदेव सिंह पटवारी, नरपिंदर सिंह रंगी व मनजीत सेठी ने विरोध करते हुए उक्त तिथियों को पास किए वित्त एंड अनुबंध कमेटी के पास किए प्रस्तावों की पुष्टि न करने संबंधी विचार रखे। साथ ही हाउस में दो अलग-अलग पत्र दिए गए जिनमें मांग की कि वित्त एंड ठेका कमेटी के काम करवाने के लिए दिए गए अधिकार वापस दिलाए जाएं।
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प्रोसीडिंग में भेजी गई है यह राय
प्रोसीडिंग में बताया गया है कि इनमें से एक पत्र पर 11 पार्षदों व दूसरे पत्र में 14 पार्षदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विधायक ने मौखिक इसका विरोध किया गया। प्रोसीडिंग में कहा गया है कि सोशल मीडिया में वायरल हुए वीडियो को देखा गया है जिसमें विरोध पक्ष 21 पार्षद व विधायक समेत 22 पार्षदों ने कमेटी से अधिकार वापस लिए जाने के हक में है जबकि दूसरी साइड 25 पार्षदों ने कमेटी की प्रोसीडिंग का समर्थन किया। वहीं 26 पार्षदों ने कमेटी के कामों को मंजूरी दी है। विरोधी दल ने कई पार्षदों के हस्ताक्षर धोखे से करवाए थे। मीटिंग में मेयर की मौजूदगी में 47 पार्षदों ने हाजिरी लगाई। दो पार्षद गैर-हाजिर पाए गए। इसके साथ ही सर्वसम्माति से सारे काम पास किए गए।
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