मोहाली। अब मेडिकल रिसर्च सिर्फ लैब में बंद नहीं रहेगी, बल्कि लोगों के इलाज और जरूरत तक पहुंचेगी। नाईपर मोहाली में शुक्रवार को हुई खास कार्यशाला में देशभर से आए शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को यही रास्ता दिखाया गया कि अगर उन्होंने कोई दवा, तकनीक या फार्मूला तैयार किया है, तो उसे पेटेंट कराकर समाज के लिए इस्तेमाल कैसे लाया जाए। इस कार्यक्रम का आयोजन इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) और भारतीय पेटेंट कार्यालय ने मिलकर किया। नाईपर के डायरेक्टर प्रो. दुलाल पंडा ने कहा कि हमारे देश में रिसर्च तो बहुत होती है, लेकिन उसे पेटेंट कराने, ट्रायल करवाने और बाजार तक पहुंचाने की राह में कई अड़चनें होती हैं। इसी वजह से कई बार हमारी खोजें वहीं दबकर रह जाती हैं। इसीलिए अब जरूरी है कि रिसर्च के साथ-साथ हम उसे कानूनी रूप से सुरक्षित भी करें। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को बताया कि पेटेंट कैसे कराया जाए, किन बातों का ध्यान रखा जाए और सरकार की किन योजनाओं से मदद मिल सकती है। आईसीएमआर की ओर से आए विशेषज्ञों ने बताया कि उनकी पेटेंट मित्र पहल के जरिए अब शोधकर्ताओं को कानूनी और तकनीकी सहायता मिल रही है, वो भी बिल्कुल मुफ्त। इस मौके पर नाईपर के कई प्रोफेसर, वैज्ञानिक और विद्यार्थी मौजूद रहे। कार्यशाला के अंत में विद्यार्थियों के सवाल भी लिए गए, जिनका विशेषज्ञों ने सीधा जवाब दिया।