मोहाली। तीन दिन लगातार हुई बारिश ने जिला प्रशासन और नगर निगम के सभी प्रबंधों की पोल खोल दी है। पांच दशक पूर्व इस समस्या के निदान के लिए पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज चंडीगढ़ (पीईसी) और नगर निगम मोहाली ने एक सर्वेक्षण किया था। नगर निगम मोहाली ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज को वर्षा जल निकासी का सर्वेक्षण करने के लिए 10 लाख रुपये का भुगतान किया, लेकिन पीईसी टीम की सिफारिशों को आज तक लागू नहीं किया गया है। नगर निगम के अनुसार इसके लिए करीब 200 करोड़ की आवश्यकता है। बजट बनाकर सरकार को भेजा गया है।
सर्वेक्षण में पीईसी ने तर्क दिया था कि शहर की 50 साल पुरानी पाइपें और डीओटी प्रणाली वर्तमान सीवेज और जल प्रवाह को संभालने में असमर्थ है। पीईसी ने एसओपीआई रिपोर्ट में तत्कालीन नगर आयुक्त से कहा था कि शहर की 26 किलोमीटर क्षेत्र में नई पाइपलाइन बिछाई जानी चाहिए। इस पाइपलाइन का व्यास 80 मिमी से बढ़ाकर 100 मीटर करने की सलाह दी गई थी। इस पाइपलाइन से पानी को पटियाला की राव नदी में छोड़ने की प्लानिंग तैयार की गई। यदि सर्वे के अनुसार काम हुआ होता तो शहर की बरसाती पानी निकासी की समस्या हल हो गई होती। इस कारण वर्तमान में बारिश के दौरान जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई। शहर में लगाए पंप भी घरों और सड़कों से पानी निकालने में नाकाफी साबित हुए। लोगों का लाखों रुपये का फर्नीचर और अन्य कीमती सामान खराब हो गया। राजनीतिक चर्चा यह है कि मोहाली शहर का विकास उतनी तेजी से नहीं हुआ, जितनी तेजी से गमाडा ने सेक्टरों को काटकर बेचा। संवाद
पांच दशक की जन निकासी हुई ठप
जानकारी के अनुसार शहर में पांच दशक पहले जल निकासी को लेकर जो पाइप डाली गई थी, वह अब पूरी तरह से जर्जर हो गई है। उस समय शहर की जनसंख्या 50 हजार के करीब थी, जो कि अब लाखों में पहुंच गई है। इस कारण बरसात में शहर में पानी भर जाता है। दूसरी तरफ नगर निगम की भी लापरवाही है कि वह बरसात के मौसम को नजदीक आते देखकर हरकत में आता है। अगर समय रहते काम शुरू कर दे तो काफी हद तक नुकसान होने से बचा जा सकता है।
नगर निगम को इस समस्या के हल के लिए 200 करोड़ रुपये की जरूरत है। बजट तैयार करके सरकार को भेजा गया, लेकिन सरकार इसे जारी नहीं कर रही है। पीईसी के सर्वेक्षण के अनुसार काम किया जाना है। -अमरजीत सिंह सिद्धू, मेयर, मोहाली
नगर निगम ने बाहरी सड़कों का लेवल बिगाड़ दिया है। दो फीट ऊंचा करने के कारण चंडीगढ़ से आने वाले पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। इस कारण यह पानी पुराने फेजों और सेक्टरों में वापस आकर लोगों के घरों में घुस जाता है। - एनएस कलसी, सेवानिवृत्त इंजीनियर, पुडा