मोहाली। संस्कृति, कलाकृति और संगीत के रस से सराबोर मोहाली के सरस मेले में राजस्थान के बूंदी जिले के कच्ची घोड़ी के लोक नृत्य ने सभी का दिल जीता और वहीं दूसरी ओर आगरा से आए कलाकारों की कलाकृतियों को देखकर दर्शक आकर्षित हो गए। मेले के आकर्षण में पंजाबी गायक शिवजोत ने गाने पेश कर चार चांद लगाए। इनके हिट नंबरों ने सभी का मन मोह लिया। शिवजोत ने यहां पर सहारा, करीब, छोटा नंबर और पंजाबेन जैसे हिट नंबर्स से सभी को मोहित किया।
सरस मेले में आगरा से आए कारीगरों की संगमरमर की कलाकृतियां सभी को मोहित कर रही हैं। यह मूर्तियां रंगों और मोतियों से सजी हैं। इन हस्तनिर्मित संगमरमर की वस्तुओं में हाथी, शेर, पानी के फव्वारे, शतरंज, गाय, गौतम बुद्ध की मूर्तियाँ, सुंदर फूलदान, लैंप, स्टूल और अन्य सजावटी वस्तुएं हैं। हस्तशिल्प कलाकार सलीम कुरैशी ने कहा कि यह उनका पुश्तैनी काम है, जो उनका परिवार पिछले 60 वर्षों से कर रहा है। पहले यह काम उनके दादा, पिता अकबर ने किया था। उन्होंने कहा कि इन संगमरमर की छवियों को तैयार करने के लिए उसी तैयार टुकड़े का उपयोग किया जाता है, जिसे छेनी और हथौड़े से तराशा जाता है और फिर मोतियों और पेंट से उकेरा जाता है। संगमरमर की वस्तु को सजाने और चमकाने के लिए मोती और पेंट का उपयोग किया जाता है। आग की मदद से संगमरमर पर पेंट की एक परत लगाई जाती है, जिससे रंग ठोस और जीवंत निकलता है।
इस मेले में राजस्थान के बूंदी जिले के शेखावाटी क्षेत्र में कच्ची घोड़ी लोक नृत्य की प्रस्तुति दर्शकों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बन रही है। राजस्थान की भूमि का यह लोक नृत्य जैसलमेर के टीलों की कठोर रेत से उत्पन्न हुआ है। विशेष रूप से यह गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र राज्यों में होता है। यह नृत्य राजस्थान का सर्वाधिक लोकप्रिय नृत्य है।
इस लोक नृत्य का नेतृत्व कर रहे गणेश कुमार सोनी ने बताया कि यह राजस्थान के पोखरण में बाबा रामदेव पीर की याद में सितंबर में तेजा दशवें माह में मनाया जाता है। इस लोक नृत्य में कलाकार अलगोजा, ढोल, गागर, खंजरी, ताल आदि लोक वाद्ययंत्रों से सुसज्जित होकर घोड़ों और छतरियों के साथ लोगों का मनोरंजन करते हैं। इस ग्रुप में 8 कलाकार अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से मेलार्थियों को झूमने पर मजबूर कर देते हैं। बाबुल लाल पिछले 40 वर्षों से इस समूह में खंजर बजा रहे हैं और अलगोजवाद अर्जुन पिछले 45 वर्षों से इस समूह का नेतृत्व कर रहे हैं और उन्होंने कहा कि उन्होंने भारत के लगभग हर राज्य में इस लोक नृत्य का प्रदर्शन किया है। ग्रुप लीडर गणेश कुमार सोनी ने बताया कि इस नृत्य में खजरी, अलगोजा, ढोल, ताल, गागर आदि लोक वाद्ययंत्रों का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा राजस्थान में तरनताली लोक नृत्य, कालवेलिया, घोड़ोनार लोक नृत्य लोकप्रिय हैं।