मोहाली। नगर निगम मोहाली का कार्यकाल फरवरी 2026 में पूरा होने जा रहा है। इसी के चलते निगम प्रशासन ने नए सिरे से वार्डबंदी (री-डिलिमिटेशन) का काम शुरू कर दिया है। निगम की सीमा विस्तार के बाद पहली बार इतने बड़े पैमाने पर वार्डों का पुनर्गठन किया जा रहा है, जिससे आने वाले चुनावों के समीकरणों पर सीधा असर पड़ सकता है। हाल ही में नगर निगम में शामिल 15 गांवों की पंचायतें इस फैसले से नाखुश हैं। वे कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रही हैं। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि बिना स्थानीय लोगों की सहमति के गांवों को नगर निगम में शामिल कर देना तर्कसंगत नहीं है।
उनका दावा है कि यदि मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो वार्ड बंदी और चुनाव कार्यक्रम पर भी प्रभाव पड़ सकता है। पंचायतों का तर्क है कि नगर निगम में शामिल होने से करों का बोझ बढ़ेगा, जबकि गांवों में अभी भी कई बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह विकसित नहीं हुई हैं। मामले में विधायक कुलवंत सिंह का कहना है कि नगर निगम चुनाव तय समय पर ही करवाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि वार्ड बंदी की प्रक्रिया नियमों के अनुसार चल रही है। सरकार चाहती है कि फरवरी 2026 से पहले सारी तैयारियां पूरी हो जाएं। कुलवंत सिंह ने यह भी कहा कि निगम के विस्तार से लंबे समय में विकास की गति बढ़ेगी, इसलिए विरोध की राजनीति छोड़कर आगे बढ़ने की जरूरत है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गांवों के विरोध ने चुनावी मैदान की स्थिति को और दिलचस्प बना दिया है। यदि पंचायतें कोर्ट चली जाती हैं, तो पूरे चुनावी कैलेंडर में बदलाव संभव है। ऐसे में आने वाला समय मोहाली की राजनीति में कई नए मोड़ ला सकता है।