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मोहाली विकास के प्रस्तावों पर निकाय विभाग की कैंची चलने से रोकने को निगम ने झोंकी ताकत

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मोहाली। नगर निगम की तरफ से पास किए जा रहे विकास कार्यों के प्रस्तावों पर निकाय विभाग की कैंची न चले। इस चीज को रोकने के लिए नगर निगम के मेयर अमरजीत सिंह जीती सिद्धू और डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह बेदी खुद मैदान में डट गए हैं। इसी मामले को लेकर उन्होंने निकाय विभाग के सचिव से मुलाकात की, साथ ही उन्हें शहर की समस्याओं और अन्य चीजों से रूबरू करवाया और उम्मीद जताई कि निकाय विभाग की तरफ से उन्हें विकास कार्यों मे सहयोग मिलेगा। इससे इलाके के विकास में तेजी आएगी।
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जानकारी के मुताबिक विधानसभा चुनाव आने में अब कुछ ही समय शेष रह गया है। ऐसे में अगर शहर में विकास होगा, इसी चीज का चुनाव में सेहत मंत्री को फायदा मिलेगा। ऐसे में नगर निगम की ओर से हाउस की मीटिंग में कई विकास कार्यों से जुुड़े प्रस्ताव पास किए गए। इनमें मुलाजिम भर्ती से लेकर अन्य काम शामिल हैं। शनिवार की मीटिंग में उन्होंने निकाय विभाग के सचिव को बताया कि नगर निगम में स्टाफ की कमी है। ऐसे में लोगों को सुविधाएं देने में दिक्कत आ रही है। जबकि मोहाली लगातार विकसित होने वाला शहर है और मोहाली में आने वाले समय में नए एरिया भी शामिल किए जाने हैं। उन्होंने निकाय विभाग से अपील की है कि भरती प्रक्रिया को तुरंत मंजूरी दें, ताकि इलाके के विकास कार्यों को मंजूरी दी जा सके।
इस मौके मेयर ने बताया कि जन सेहत विभाग की ओर से करवाए जाने वाले विकास कार्य भी उन्होंने खुद करवाने का फैसला लिया है। इसके लिए मुलाजिम डेपुटेशन पर लिए जाने हैं।
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डायरेक्टर से भी मिले मेयर और कमिश्नर
मेयर और डिप्टी मेयर ने बताया कि स्थानीय
निकाय विभाग के सचिव ने उन्हें सहयोग का भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा कि वह खुद गमाडा के सीए और निगम के प्रशासक रह चुुके हैं। उन्हें मोहाली की समस्याओं के बारे में पूरी जानकारी है। इसके बाद मेयर और डिप्टी मेयर ने स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक से मुलाकात की। उनके साथ नगर निगम के कमिश्नर कमल गर्ग भी साथ में थे।
आखिर क्यों पड़ी मीटिंग की जरूरत
जानकारी के मुताबिक कुछ समय पहले निगम ने कई प्रस्ताव पास करके निकाय विभाग को भेजे थे। इनमें वार्षिक बजट तक शामिल था। राज्य में कांग्रेस की अपनी सरकार और नगर निगम पर कांग्रेस का कब्जा था। इसके बाद भी निकाय विभाग ने कई प्रस्तावों पर रोक लगा दी थी। जबकि कई कामों पर पर निगम से जवाब तलब किया गया था। ऐसे में इस बार यह नौबत न बने और विपक्ष को कोई मुद्दा न मिले, इसलिए सत्ताधारी दल हर प्रयास कर रहा है। हालांकि वह इसे शिष्टाचार की बैठक बता रहा है।
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