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मोहाली में शिक्षा भवन घेरकर बैठे शिक्षकों ने लगाया जाम, शिक्षा मंत्री से बैठक तय होने पर हटाया, चंडीगढ़ का रास्ता किया बंद

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मोहाली। पिछले छह दिनों से कच्चे अध्यापक शिक्षा विभाग का मुख्यालय घेर कर बैठे हैं। मांगे न माने जाने पर जान देने की धमकी के साथ चार अध्यापक शिक्षा विभाग की छत पर चढ़े हुए हैं। सोमवार दोपहर प्रदर्शनकारियों ने चंडीगढ़ की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग को फेज 6-7 की लाइटों पर जाम कर दिया। प्रशासन की ओर से मंगलवार को शिक्षा मंत्री के साथ बैठक तय होने के बाद प्रदर्शनकारियों ने जाम हटाया। वहीं, प्रदर्शनकारी शिक्षक अब मुलाजिम और किसान संगठनों से संपर्क कर समर्थन जुटाने की कवायद में लग गए हैं।
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यह अस्थायी शिक्षक विभाग में अपने को स्थायी करने की और समान वेतन की मांग को लेकर पिछले बुधवार से शिक्षा विभाग का घेराव करके बैठे हैं। चार प्रदर्शनकारी पिछले 6 दिन से पेट्रोल की बोतलें और सल्फास की गोलियां लेकर शिक्षा विभाग की छत पर चढ़े हुए हैं। बुधवार से अब तक जिला प्रशासन, शिक्षा सचिव कृष्ण कुमार और सरकार के नुमाइंदों से प्रदर्शनकारियों की कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। इन बैठकों में अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है। प्रदर्शनकारियों ने सोमवार दोपहर करीब डेढ़ बजे चंडीगढ़ की ओर जाने वाली मुख्य सड़क को फेज 6 व 7 की लाइटों पर जाम कर दिया। प्रदर्शनकारी पूरे चौक को घेर कर बैठ गए। इसके बाद चारों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। पुलिस को ट्रैफिक डायवर्ट कर स्थिति को संभालना पड़ा।
पंजाब-चंडीगढ़ की लाइफलाइन बंद होने से शहर में यातायात की स्थिति गड़बड़ा गई। पंजाब से चंडीगढ़ आने-जाने वालों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। दोपहर करीब तीन बजे प्रशासन द्वारा शिक्षा मंत्री के साथ मंगलवार को बैठक तय करवाए जाने के बाद प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने जाम हटाया। अब मंगलवार को चंडीगढ़ के पंजाब भवन में शिक्षा मंत्री विजय इंदर सिंगला और मुख्यमंत्री के सियासी सचिव कैप्टन संदीप संधू केे साथ प्रदर्शनकारी अध्यापकों के प्रतिनिधिमंडल की बैठक होगी।
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वहीं, प्रदर्शनकारियों की नुमाइंदगी कर रहे दविंदर सिंह संधू, अजमेर सिंह औलख और वीरपाल सदाना का कहना है कि विभाग में स्थायी किए जाने और समान वेतन से कम पर संघर्ष रुकने वाला नहीं है। इसके साथ ही प्रदर्शनकारी अध्यापकों ने अपने लिए समर्थन जुटाने की कवायद भी शुरू कर दी है। इसके लिए मंगलवार को अन्य अध्यापक और मुलाजिम संगठनों के साथ बैठक रखी गई है। प्रदर्शनकारी किसान संगठनों से भी समर्थन हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं।
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