डेराबस्सी। केंद्रीय ट्रेड यूनियन संगठनों के आह्वान पर मोदी सरकार की लोक विरोधी व मुलाजिम विरोधी नीतियों के खिलाफ की गई हड़ताल का डेराबस्सी में समर्थन देखने को मिला। इस दौरान नगर काउंसिल जीरकपुर, डेराबस्सी और लालड़ू ने मुकम्मल तौर पर काम बंद करके एक दिन की हड़ताल कर रोष मार्च निकाला।
शहर के मुख्य बाजार में निकाले रोष मार्च में कई फैक्ट्रियों के कामगार भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने बारिश के बावजूद दोपहर के दो बजे तक प्रदर्शन किया। एटक, सीटू, सी.पी.आई., सीपीआई (एम) पससफ व मुलाजिम फैडरेशनों के वक्ताओं ने विचार प्रकट किए। इस अवसर पर कामरेड विनोद चुग उपप्रधान पंजाब एटक, मुख्य नेता बलविंद्र सिंह जड़ोत जनरल सचिव सी.पी.आई., अवतार सिंह दप्पर तहसील सचिव सी.पी.आई., कामरेड भुपिंद्र सिंह जंडली, रविंद्रपाल सिंह प्रधान नगर काउंसिल इंप्लाइज यूनियन जीरकपुर, प्रदीप सूद प्रधान सफाई यूनियन जीरकपुर, राज मेहरा जीरकपुर, सतीश कुमार, हरविंद्र सिंह प्रधान नगर काउंसिल वर्कर यूनियन (एटक) डेराबस्सी, सोमनाथ जनरल सचिव, जीवन कुमार खजांची, प्रवीन कुमार प्रधान नगर पंचायत वर्कर यूनियन (एटक) लालड़ू, बिट्टू जनरल सचिव, हरपाल कोषाध्यक्ष, राजेश कुमार पूर्व प्रधान लालड़ू, राकेश सिंह यादव रेनबो डेनिम वर्करज यूनियन (एटक) लालड़ू व जनरल सचिव सीता राम आदि ने भी रैली को संबोधित किया।
ये रहे मुख्य मुद्दे
-मोदी सरकार की देश व विदेशी आद्योगिक घरानों को लाभ देने के लिए नीतियां बनाने का विरोध।
-44 केंद्रीय श्रम कानूनों को तोड़कर 4 कोड में तबदील करना।
-न्यूनतम वेतन 21000 तय करना।
-सार्वजनिक संस्थानों का निजीकरण रोकना।
-ठेकेदारी प्रथा खत्म करके सभी कामगारों को पक्का कराना।
-2004 से नई शुरू की गई पेंशन स्कीम रद्द करके पुरानी पेंशन स्कीम बहाल कराना।
-बेरोजगारी दूर करना व महंगाई रोकना।
-सामाजिक सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध करना।
-मनरेगा कानून को शहरों में भी लागू करना व साल में 200 दिनों का काम देना।
-सुप्रीम कोर्ट के बराबर काम बराबर वेतन के फैसले को लागू करवाना।
-वेतन कमिशन की सिफारशें जल्दी लागू करवाना।
-बुढ़ापा, विधवा व दिव्यांग पेंशनरों की पेंशन बढ़ाना।