मोहाली। शहर में आप जिधर भी नजर डालेंगे, आपको कोई न कोई रेहड़ी-फड़ी लगी देखने को मिलेगी। वहीं, शाम होते-होते इनकी संख्या बढ़ जाती है। हालात यह है कि रेहड़ी-फड़ी वालों ने फुटपाथ ही नहीं सड़कों पर अपना सामान रखकर बेचना शुरू कर दिया है। इस कारण शहर के कई इलाकों में मुख्य सड़कों पर इनके कारण जाम जैसी स्थिति बनी रहती है।इनके कारण शहर की सुंदरता पर ग्रहण लगा हुआ है। लेकिन उसके बावजूद नगर निगम शहर को रेहड़ी-फड़ी मुक्त करवाने के लिए पूरी तरह से फेल साबित हो रहा है। यहीं नहीं इससे नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
शहर की सड़कों और बाजारों के पार्किंग स्थलों पर इन रेहड़ी-फड़ी के कारण, जहां बाजारों में खरीदारी करने आए लोगों को अपने वाहन पार्क करने में परेशानी होती है, वहीं सड़कों के किनारे रेहड़ी-फड़ी से यातायात भी बाधित होता है। इस संबंध में शहरवासियों का यह भी आरोप है कि ये कब्जाधारी नगर निगम के कर्मचारियों को हर महीने एक निश्चित राशि का भुगतान करते हैं, जिसके बदले में निगम का फील्ड स्टाफ द्वारा उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। लोगों का कहना है कि अगर परेशानी के दौरान इनको रेहड़ी-फड़ी हटाने के लिए बोलते है तो वह लोगों से ही लड़ने लगते है।
फेज-1 और 11 में सबसे ज्यादा रेहड़ी-फड़ी का कब्जा
शहर में सबसे ज्यादा रेहड़ी-फड़ी का कब्जा फेज 1 और फेज 11 में है। फेज 1 में सड़क किनारे और फुटपाथ पर रेहड़ी फड़ी वालों का कब्जा है। यहां पर अवैध तौर पर मंडी बनाकर रेहड़ी-फड़ी वालों ने कब्जा कर रखा है। यहीं नहीं फेज 11 में हाल यह है कि सड़क किनारे रेहड़ी-फड़ी वालों द्वारा फल बेचे जा रहे है। रेहड़ी-फड़ी वालों ने फेज 11 में सड़क पर ही फल बेचने शुरू दिए है। नगर निगम की ओर से दिखावे के लिए यहां कार्रवाई की जाती है और उसके बाद फिर से दुकानें सज जाती हैं। फेज 11 में अंदरूनी सड़क पर भी रेहड़ी-फड़ी वालों के कब्जों की भरमार है। इसके अलावा शहर के कई फेजों और सेक्टरों में बी रोड पर रेहड़ी-फड़ी वालों द्वारा अपनी रेहड़ी लगाकर सड़क पर कब्जा किया गया है। सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के वार्ड में पड़ते सेक्टर 71 और फेज 3बी2 में तो सरेआम फुटपाथ पर नाजायज तौर पर सब्जी की दुकानें तक खोल रखी हैं।
बाक्स
शहर को रेहड़ी-फड़ी मुक्त करने के लिए नगर निगम की ओर से स्ट्रीट वेडिंग जोन भी बनाए गए है परंतु यहां पर कोई भी रहेड़ी-फड़ी वाले जाने को तैयार नहीं है। इससे शहर में दिन प्रतिदिन रेहड़ी फड़ी वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। निगम के पास शहर में सिर्फ करीब साढ़े सात सौ के करीब रजिस्टर्ड रेहड़ी है। परंतु हालात यह है कि शहर में करीब पांच हजार रेहड़ी-फड़ी चालक है जो कि अपने मर्जी से कहीं भी कब्जा कर लेते है।