हरियाणा व पंजाब सरकार को प्रत्येक जिले के बारे में जानकारी सौंपने का दिया गया आदेश
कुत्तों का शिकार हुए लोगों व कुत्तों के आतंक से बचाने के कदम की देनी होगी जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। लावारिस कुत्तों के मामले में दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान चार साल मेंं 14 हजार नसबंदी होने के बावजूद चंडीगढ़ में लावारिस कुत्तों की बढ़ती संख्या पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चिंता जताई है। हाईकोर्ट ने हरियाणा व पंजाब सरकार को प्रत्येक जिले में कुत्तों के काटने की घटना व उनके आतंक से बचने के लिए उठाए कदमों की जानकारी सौंपने का आदेश दिया है। साथ ही चंडीगढ़ प्रशासन से कुत्तों की वर्तमान संख्या का ब्योरा मांगा है।
अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया कि 20212 के आंकड़ों के अनुसार शहर में लावारिस कुत्तों की संख्या 7847 थी और निगम के अनुसार 2015 से 2019 के बीच करीब 14 हजार की नसबंदी की गई। इतने बड़े स्तर पर नसबंदी की कार्रवाई के बावजूद 2019 में शहर में इनकी संख्या 12922 पहुंचने पर हाईकोर्ट ने हैरानी जताई। हाईकोर्ट ने इसपर जवाब मांगा तो प्रशासन ने बताया कि इनसे प्यार व मान्यताओं के कारण लोग इन्हें भोजन देते हैं। इस कारण निगम की ओर से इनपर कार्रवाई का विरोध करते हैं। इसके साथ ही कोर्ट को बताया गया कि अब सेक्टर 22, 45, 16 व 32 के अस्पतालों में एंटी रेबीज के टीके उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। इसके साथ ही सेक्टर 19 और 38 की डिस्पेंसरी में एंटी रेबीज ट्रेनिंग दी जा रही है। शहर में गरीब लोगों को एंटी रेबीज का मुफ्त टीका लगाने की व्यवस्था भी की गई है। हाईकोर्ट ने कहा कि लावारिस कुत्तों की समस्या बेहद गंभीर है और ऐसे मेंं यूटी प्रशासन व हरियाणा, पंजाब को जिलों के बारे में विभिन्न जानकारी सौंपने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट की ओर से मांगी गई जानकारी
-शहर में लावारिस पशुओं की वर्तमान संख्या क्या है? कितनों की नसबंदी की गई और और कितनों की नहीं
-शहर मेंं ऐसे कौन से साझे स्थान, जहां लोग लावारिस कुत्तों को भोजन देते हैं और क्या यहां इनकी संख्या में बढ़ोतरी हुई है?
-लावारिस कुत्तों की परेशानी से निजात दिलाने के लिए फंड, स्टाफ व वाहनों की मौजूदगी से जुड़ा ब्योरा
-वर्ष 2022 के दौरान लावारिस कुत्तों के काटने से जुड़े कितने मामले क्षेत्र में सामने आए हैं
-कुत्तों के आतंक से जुड़ी शिकायतें आने वाले मुख्य क्षेत्रों की जानकारी