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Mohali News: डेराबस्सी की कॉलोनी में अवैध कब्जा तोड़ने पहुंची जेसीबी पर फेंके पत्थर

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डेराबस्सी। गांव डेरा की विवादित दशमेश नगर कॉलोनी में हुए कब्जे के मामले में बुधवार को कार्रवाई करने पहुंची जेसीबी मशीन के विरोध पत्थर फेंके। इस दौरान नगर परिषद की जेसीबी मशीन का शीशा टूट गया। पहले ही मकान की नींव ढहाते यहां वक्त बवाल हो गया और नगर परिषद को कार्रवाई रोकनी पड़ी। मौके पर एकत्रित सैकड़ों लोगों ने बताया कि उन्होंने खून पसीने की कमाई से यहां प्लॉट खरीदे और अब इसे अवैध बताकर हटाया जा रहा है। लोगों का कहना है कि अगर अवैध रूप से प्लॉट बेचे गए हैं तो उनके रुपये वापस दिलाए जाएं। जब तक बिल्डर उनका पूरा भुगतान नहीं करता वह जमीन का कब्जा नहीं छोड़ेंगे, इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की है। लोगों ने परिषद के अधिकारियों के खिलाफ जांच की मांग की है।कॉलोनी के लोगों ने बताया कि इतने वर्षों के बाद नगर परिषद के अधिकारियों को पता चला है कि कॉलोनी अवैध है, जबकि कॉलोनी में बने दर्जनों मकानों के नक्शे इसी नगर परिषद ने पास किए हैं। यही नहीं पानी के कनेक्शन जारी किए गए है। इसके बावजूद जब कॉलोनी के निवासियों ने बिल्डर के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत की तो नगर परिषद के अधिकारियों ने कार्रवाई भी नहीं की। अब नगर परिषद का अमला बिना सूचना के मशीन लेकर नींव तोड़ने पहुंच गया। कॉलोनीवासियों का आरोप है कि बिल्डर के खिलाफ नगर परिषद में की गई शिकायत पर कई दिन बीतने के बाद भी कार्रवाई नहीं की गई। बिल्डर ने लाखों की ठगी की है। तमाम साक्ष्य उपलब्ध कराने के बावजूद परिषद कार्रवाई नहीं कर रहा है। उन्होंने उच्च अधिकारियों से मामले की जांच कराने की मांग की है।
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नगर परिषद की बिल्डिंग ब्रांच के इंस्पेक्टर गुरप्रीत सिंह से बात करने पर उन्होंने बताया कि जमीन मालिक की ओर से शिकायत मिली थी कि कॉलोनी में अवैध निर्माण हो रहा है। दो दिन पहले उसने काम करना बंद कर दिया था। कल जब वे मौके पर मशीन से नींव तोड़ रहे थे तो मशीन पर पत्थर फेंककर शीशा तोड़ दिया गया। मामले की सूचना पुलिस को दी गई है।


बॉक्स के लिए

कार्यकारी अधिकारी नहीं देते जानकारी

जब परिषद के कार्यकारी अधिकारी जगजीत सिंह जज से संपर्क करने का प्रयास किया तो उन्होंने फोन उठाना उचित नहीं समझा। वीरवार को जब बार-बार फोन पर संपर्क करने की कोशिश की तो उन्होंने फोन का जवाब देना उचित नहीं समझा। यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि कार्यरत पदाधिकारी मामले में सामने आने से क्यों बच रहे हैं।
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