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शारदीय नवरात्र शनिवार से, कोरोना की वजह से नहीं रहेगी पहले जैसी धूम

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मोहाली। शारदीय नवरात्र इस सप्ताह के अंत में शुरू हो जाएंगे। 17 अक्तूबर को पहली नवरात्रि पूजा होगी। हालांकि हर साल ये पितृपक्ष के समाप्त होने के अगले दिन से ही शुरू हो जाते हैं, लेकिन इस बार पुरुषोत्तम मास ने पितृपक्ष और नवरात्रि के बीच करीब एक महीने का अंतर ला दिया है। ऐसे में अब मां के आगमन में करीब एक महीने का समय बचा हुआ है। हालांकि इस साल कोरोना की वजह से ये नवरात्र की पहले जैसी धूम नजर नहीं आएगी।
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सनातन धर्म में नवरात्रि का खास महत्व है। नौ दिनों तक मां के अलग-अलग रूपों की पूजा धूमधाम और श्रद्घा से की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना के साथ ही मां की पूजा शुरू हो जाती है। कई जगह पर पंडाल सजाकर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती है। केंद्रीय पुजारी परिषद के प्रधान पंडित जगदंबा प्रसाद रतूड़ी ने बताया कि इस बार मां पृथ्वी किस पर सवार होकर आ रही हैं और उनके आगमन का प्रभाव कैसा रहेगा।
पंडित जगदंबा प्रसाद रतूड़ी ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र और देवी भागवत पुराण के अनुसार मां दुर्गा का आगमन आने वाले भविष्य की घटनाओं के बारे में हमें संकेत देता है। देवी भागवत पुराण में इस बात का जिक्र है कि देवी के आगमन का अलग-अलग वाहन है। माना जाता है कि अगर नवरात्रि की शुरुआत सोमवार या रविवार को हो रही है तो इसका मतलब है कि वो हाथी पर आएंगी। वहीं, अगर शनिवार या फिर मंगलवार को कलश स्थापना हो रही है तो मां घोड़े पर सवार होकर आती हैं। वीरवार या शुक्रवार को नवरात्र का आरंभ होता है तो माता डोली में आती हैं, वहीं बुधवार के दिन मां नाव को अपनी सवारी बना कर आती हैं।
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पंडित रतूड़ी कहते हैं कि इस बार दुर्गा पूजा और नवरात्रि की शुरूआत शनिवार से हो रही है, ऐसे में मां घोड़े को अपना वाहन बनाकर धरती पर आएंगी। इसके संकेत अच्छे नहीं हैं। यह भी माना जाता है कि घोड़े पर आने से पड़ोसी देशों से युद्ध, सत्ता में उथल-पुथल और साथ ही रोग और शोक फैलता है। वह कहते हैं कि इस बार मां भैंसे पर विदा हो रही हैं और इसे भी शुभ नहीं माना जाता।
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