मोहाली। जिले में भले ही कोरोना महामारी की वजह से सभी कामों की रफ्तार धीमी पड़ गई है, लेकिन बच्चों की सेहत को लेकर जिला सेहत विभाग ने जरा भी ढील नहीं बरती। कोरोना काल में भी अन्य बीमारियों से लड़ने की बच्चों के अंदर क्षमता पैदा करने के लिए लगातार टीकाकरण मुहिम जारी रखी। नवजात से लेकर पांच महीने और दस साल तक के 17 हजार बच्चों का टीकाकरण किया जा चुका है। बच्चों के परिजनों को कोई मुश्किल न आए, इसके लिए टीकाकरण की सुविधा लोगों के गांव और घर द्वार पर ही दी गई। नर्सों ने अस्पताल के अलावा गांव स्तर की डिस्पेंसरियों में जाकर टीकाकरण किया।
जानकारी के मुताबिक मोहाली में पिछले साल जनवरी, 2020 से दिसंबर 2020 तक 7 हजार से अधिक बच्चों ने जन्म लिया था। इसके साथ ही जिले में करीब 10 हजार एक साल से लेकर दस साल तक के बच्चों को गंभीर बीमारियों से लड़ने का टीका लगाया गया। सेहत कर्मचारियों द्वारा कोरोना जैसे हालातों में भी गांव गांव में पहुंचकर टीकाकरण किया जा रहा है। वहीं, गांव में बनी डिस्पेंसरियां में हर बुधवार को ही टीकाकरण किया जाता है। बच्चों के टीकाकरण कि इंचार्ज डॉक्टर डिंपल ने बताया कि कोरोना की शुरुआत से ही हमारी कोशिश रहती है, हर बच्चे को बुधवार और शनिवार को उम्र के हिसाब से वैक्सीन लगती रहे। ताकि बच्चों को बीमारियों से बचाया जा सके। क्योंकि यह सभी टीके बच्चों की इम्यूनिटी को मजबूत करने के लिए ही लगाए जाते हैं। वहीं उन्होंने बताया कि कोरोना के बीच पिछले साल जिन बच्चों का टीकाकरण छूट गया था, उन बच्चों को टीका पहले लगाया जाता है। जिस उम्र में बच्चा होता है उससे एक दो महीने के अंतराल में यह जरूर लगाया जाता है।
इस संबंधी डॉ. डिंपल ने बताया कि कोरोना वायरस के कारण बुधवार को अस्पताल में 30 से 40 बच्चे टीकाकरण के लिए लाए जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि जिनके बच्चे सिविल अस्पताल में पैदा हुए वह बच्चों के टीकाकरण के लिए जिला सिविल अस्पताल में आने के बजाय अपने इलाके की डिस्पेंसरी में जाकर टीकाकरण करवाएं।
बच्चों के लिए टीकाकरण बहुत जरूरी
टीकाकरण करने वाली नर्स मनप्रीत कौर ने बताया कि कोरोना के कारण काफी माता-पिता बच्चों को टीकाकरण करवाना छोड़ देते हैं। जबकि बच्चों को लगने वाले टीकाकरण काफी अहम हैं। नव जन्में बच्चे को शुरुआत में ही बीसीजी और हेपेटाइटिस का टीकाकरण और ओरल पोलियो वैक्सीन की ड्रॉप दी जाती है, जो कि एक नवजात बच्चे के लिए जरूरी होता है। उसके बाद बच्चे पैदा होने के 45 दिनों बाद पेंटावेलेंट, आईपी, ओपीवी, ओरल पोलियो वैक्सीन और रोटा नामक ड्राप दी जाती है।
इसके बाद 45 दिनों के टीकाकरण के चार सप्ताह के बाद पेंटावेलेंट दूसरी खुराक और ओपीवी के साथ रोटा की बूंद पिलाई जाती है। उसके बाद इन्हें इंजेक्शन के और बूंद देने के 9 महीने पूरे होने पर लगते हैं। इसके बाद डेढ़ साल के बच्चे से लेकर दो साल के बच्चे को टीकाकरण लगता है। फिर पांच साल के बच्चे को टीकाकरण किया जाता है। आखिरी टीका 10 साल के और 16 साल के बच्चे को लगाया जाता है। जो कि टेटनस और डिप्थीरिया के कॉम्बिनेशन को मिलाकर लगाया जाता है।