मोहाली। पंजाब रोडवेज पनबस पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन पंजाब के कर्मचारियों ने मांगों के लिए फेज- 6 स्थित बंदा बहादुर सिंह बस स्टैंड पर हड़ताल के दूसरे दिन मंगलवार को सुबह दस बजे से छह घंटे तक प्रदर्शन किया। इस दौरान पनबस और पीआरटीसी की पूरे पंजाब में रोडवेज बसें बंद रहीं। सुरक्षा के मद्देनजर धरनास्थल पर भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा। जब प्रदर्शनकारियों को एसडीएम दमनदीप कौर ने 15 जनवरी को साढ़े तीन बजे मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ मीटिंग का आश्वासन दिया तो प्रदर्शन समाप्त किया गया।
यूनियन के राज्य अध्यक्ष रेशम सिंह गिल ने कहा कि 2 जनवरी 2025 को पंजाब के परिवहन मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर ने खाद्यान्न व्यवस्था के लिए बैठक की थी। बैठक में विभिन्न परिवहन संगठनों को भी शामिल किया गया था और परिवहन कर्मचारियों के लिए 10 वर्ष डाउन कैडर की नीति लागू की। साथ ही जबरदस्ती अनुबंध पर भर्ती की गई। जिसमें स्थायी परिवहन कर्मचारियों को मिलने वाली विशेष सुविधा शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर समाधान नहीं हुआ तो हम दिल्ली आम आदमी पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के आवास के सामने धरना देंगे और पार्टी के खिलाफ अभियान चलाएंगे।
संगठन ने कहा कि हमें सेवा नियमों के तहत स्थायी किया जाना चाहिए, न कि इस अशिष्ट नीति के तहत। हम इसका विरोध करते हैं। हां, इसके लिए नीति को लेकर जत्थेबंदी लगभग एक साल से लगातार सरकार के साथ बैठक कर रही है। हर बार सरकार टालमटोल कर समय बिताने की कोशिश कर रही है। यह लगभग एक साल से चल रहा है।
रेशम सिंह ने कहा कि हाल ही में परिवहन मंत्री ने 9 फरवरी 2024 को परिवहन कर्मचारियों की मांगों को हल करने की घोषणा की थी और इसके लिए समिति गठित की थी, जिसमें 2 माह में मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया था। वहीं 7 मांगों में से एक भी मांग का निराकरण नहीं हुआ। इस दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री ने एक जुलाई 2024 को पैनल मीटिंग कर 1 महीने में मांगों का समाधान करने का आश्वासन दिया था।
अनुबंध कर्मचारियों के लिए सेवा नियम योजना के तहत अनुबंध कर्मचारियों को नौकरी देने का फैसला लिया गया है। आउटसोर्स कर्मचारियों को संविदा पर रखने, ठेका प्रथा समाप्त करने, सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार समान कार्य के लिए समान वेतन व अल्प वेतन पर कार्यरत कर्मचारियों का वेतन समान करने, जानलेवा शर्त समाप्त करने, किलोमीटर स्कीम (निजी) के संबंध में समिति का गठन किया गया। इन सभी मांगों को पूरा करने के लिए विभाग से अनुरोध किया गया है, जिसमें विभाग में अपनी स्वामित्व वाली दस हजार बसें रखने तथा बस स्टैंड से संचालित परिवहन माफिया को रोकने की मांग शामिल है। लेकिन किसी भी मांग का समाधान नहीं हुआ है।