मोहाली। कोरोना महामारी के बीच पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के स्कूलों में ऑनलाइन असेसमेंट शुरू हो गया है। यह पहली बार है जब बोर्ड स्टूडेंट्स की ऑनलाइन परीक्षाएं ले रहा है। बिना टीचर्स के हो रही इन परीक्षाओं की सार्थकता पर भले ही सवाल हों, लेकिन बोर्ड इसे समय की मांग बताते हुए सही ठहरा रहा है। वहीं, परीक्षाओं को लेकर कनेक्टिविटी जैसी कई समस्याएं भी सामने आ रही हैं।
कोविड-19 के चलते स्कूल बंद हैं। स्टूडेंट्स ऑनलाइन क्लासेज के जरिए अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं। इसी बीच पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने राज्य भर के अपने स्कूलों में ऑनलाइन असेसमेंट शुरू कर दिया है। वर्चुअल स्टडी के बाद अब यह अपनी तरह की नई पहल है। जिसमें स्टूडेंट्स ऑनलाइन परीक्षा दे रहे हैं। पीएसईबी से संबंधित स्कूलों में अभी तक करवाए गए सिलेब्स को आधार बनाकर यह परीक्षाएं ली जा रही हैं।
हर परीक्षा के लिए अधिकतम 20 अंक निर्धारित किए गए हैं। बोर्ड की ओर से पहली बार करवाए जा रहे ऑनलाइन असेसमेंट को लेकर राज्य में कई जगह कनेक्टिविटी को लेकर समस्याएं भी आईं। जिस पर बोर्ड के स्टेट मीडिया कॉर्डिनेटर हरदीप सिंह सिद्घू का कहना है कि राज्य के हर जिले में एक साथ पहली बार ऑनलाइन परीक्षा करवाई जा रही है। जिसे लेकर कुछ परेशानियां आईं, लेकिन शिक्षा अधिकारी और टीचर्स परिजनों के सहयोग से इसे सफलतापूर्वक करवाने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं।
मोहाली के जिला शिक्षा अधिकारी सेकेंडरी हिम्मत सिंह ने कहा कि पहली बार करवाई जा रही ऑनलाइन परीक्षा को लेकर भले की कुछ समस्याएं शुरूआती दौर में आ रही हैं, लेकिन भविष्य में इसके सार्थक नतीजे सामने आएंगे। इससे स्टूडेंट ज्यादा जिम्मेदार बनकर सामने आएंगे। टीरा के सरकारी सेकेंडरी स्कूल की टीचर शुभला शर्मा ने बताया कि मौजूदा हालत के मद्देनजर ऑनलाइन स्टडी की तरह ही ऑनलाइन परीक्षा भी समय की मांग है। वर्चुअल स्टडी के साथ ही इसके असेसमेंट की जरूरत भी महसूस की जा रही थी। जिससे स्टूडेंट भी अपनी स्टडी को लेकर गंभीर हो सकें।
वहीं मल्टीपर्पज सरकारी सेकेंडरी स्कूल की प्रिंसिपल नवदीप संधू का कहना है कि परिजनों की निगरानी में घर बैठे परीक्षा देना, स्टूडेंट्स के लिए नया अनुभव है। वहीं, परिजन भी ऑनलाइन परीक्षाओं को एक बेहतर पहल मानते हैं। स्मार्ट सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के स्टूडेंट यादविंदर सिंह के पिता केवल सिंह, राजीव मोहम्मद के पिता कश्मीर खान और विशाल की माता सोनिया का कहना है कि जब तक परीक्षा नहीं होगी, तब तक स्टूडेंट्स अपनी स्टडी को लेकर गंभीर नहीं होंगे। हालांकि परिजन इसमें सुधार की गुंजाइश से इंकार नहीं करते।