फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पजेशन न मिलने पर बिल्डर के खिलाफ की नारेबाजी

विज्ञापन
बिल्डर के खिलाफ प्रदर्शन करते लोग। - फोटो : MOHALI
विज्ञापन
जीरकपुर। एयरपोर्ट रोड पर स्थित एरोसिटी के ब्लॉक-1 में जीबीपी टेक्टाउन के प्लॉट मालिकों को डेढ़ साल से पजेशन नहीं मिला है। इसके विरोध में लोगों ने बिल्डर के खिलाफ नारेबाजी की। इस परियोजना में कुल 370 प्लॉट हैं। लोगों का आरोप है कि बिल्डर ने प्लॉट का रजिस्ट्रेशन करवाने की आड़ में फ्लैट भी बना डाले। बिल्डर ने दिसंबर 2019 में पजेशन देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन लॉकडाउन के चलते इसे अगस्त 2020 तक बढ़ा दिया गया है। अब मार्च 2021 तक भी पजेशन तो दूर मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं करवाई गई हैं।
विज्ञापन

प्लॉट मालिकों ने बताया कि वह पूरा भुगतान करने के साथ-साथ रजिस्ट्रियां भी करवा चुके हैं। इसके बावजूद न तो नियमित बिजली की सप्लाई दी जा रही है और न ही रोड और पानी की सप्लाई का प्रबंध हैं। बिल्डर ने दो माह पहले परियोजना को विकसित करने का आश्वासन देकर लोगों को चुप करवाने की कोशिश की। लोगों ने निर्माण कार्य शुरू कर दिया है, लेकिन बिजली और पानी की सुचारू आपूर्ति न होने के कारण काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। लोगों का आरोप है कि अब बिल्डर ने फोन उठाना भी बंद कर दिया है। इतना ही नहीं 20-20 हजार रुपये मेंटेनेंस चार्ज (सिक्योरिटी) के तौर पर भी जमा करवाए गए हैं।
क्या कहते हैं लोग
बिल्डर को सुननी चाहिए मांगें
हम मकान बनाना शुरू कर चुके हैं। बैंकों से लोन लिया है, ऐसे में परियोजना का अधर में लटकना बड़ी परेशानी का सबब बना हुआ है। बिल्डर को हमारी मांगें सुननीं चाहिए और जायज हक दिलवाना चाहिए। -हरीश, ऐरोसिटी ब्लॉक-1 में टेक्टाउन में प्लॉट के मालिक।
विज्ञापन

देना पड़ रहा किराया और किस्तें
बिल्डर सैकड़ों लोगों से ठगी कर चुका है। मैंने खुद के लिए एक आलीशान घर बनाने के लिए बहुत सारे पैसे जमा किए थे, लेकिन लाखों रुपये रद्दी हो गए। मैंने बैंक से 24 लाख का कर्ज लिया है। अब मुझे किराया व किश्तें दोनों देनी पड़ रही हैं। -शंभु प्रसाद, प्लॉट मालिक।
गहने गिरवी रखकर लिया लोन
गहने गिरवी रखकर 60 लाख रुपये का लोन लिया है, लेकिन 2019 से पजेशन देने की बात चल रही है, अभी तक मकान पूरा नहीं हो पाया है। आज भी हमें 15 हजार रुपये किराया देकर एरोसिटी-आई ब्लॉक में रहना पड़ रहा है। बिल्डर फोन भी नहीं उठा रहा है। -संतोष, प्लॉट मालिक।
पूरा नहीं हुआ घर का सपना
मुझे सरकारी मकान नहीं मिला होता आज मैं सड़क पर आ चुका होता। बिल्डर की कमियों की वजह से घर बनाने का सपना पूरा नहीं हो सका है। पाई-पाई जोड़कर प्लॉट खरीदा था। अगर मेरे पास सरकारी घर नहीं होता तो मरने की नौबत आ गई थी। -पवन कुमार, प्लॉट मालिक।
लोग मुफ्त में बिजली पानी चाहते हैं जो संभव नहीं है। मेरे 50 लोग आज भी वहां काम कर रहे हैं जो लोगों के घर जाकर बिजली कनेक्शन की फाइलें मांग रहे हैं। साइट पर लोगों का काम हो रहा है। -सतीश गुप्ता, बिल्डर जीबीपी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें