चंडीगढ़। यूटी पुलिस में हुए 1.1 करोड़ रुपये के वेतन घोटाले की जांच फिलहाल ठंडे बस्ते में है। मामले में जांच के लिए सीएफएसएल लैब में कुछ सैंपल भेजे गए थे लेकिन रिपोर्ट में देरी के कारण कोर्ट में पेश किए जाने वाला सप्लीमेंट्री चालान भी बीच में अटक गया है। इस मामले के चलते कई पुलिसकर्मियों की पदोन्नति भी भी फंसी हुई है। इन पुलिसकर्मियों ने हाल ही में पुलिस महानिदेशक (डीजी) से भी मुलाकात की थी। इसके बाद घोटाले की जांच की फाइल मुख्यालय में तलब की गई थी। इस मामले में 20 अप्रैल को जिला अदालत में सुनवाई होनी है, जिसमें जांच टीमों की ओर से सप्लीमेंट्री चालान पर जवाब देना है।
दरअसल, वर्ष 2018-19 में पुलिस को अज्ञात शिकायत मिली थी कि यूटी पुलिस के जवानों के खातों में ज्यादा रुपये डालकर घोटाला किया जा रहा है। इसके बाद दिसंबर 2019 में पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक से भी ऑडिट करवाने की मांग की। जब ऑडिट हुआ और पिछले कुछ सालों का रिकॉर्ड खंगाला गया तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए।
ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि 210 पुलिसकर्मियों के खातों में अलग-अलग तरह से अतिरिक्त वेतन सहित अन्य कई प्रकार के क्रेडिट किए गए। घोटाला वर्ष 2015 में शुरू हुआ और वर्ष 2019 तक चला। करीब साढ़े तीन साल में करीब 1.1 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया। यूटी प्रशासन के फाइनेंस विभाग के अंर्तगत काम करने वाली ई-सेवार्थ पोर्टल और वाउचरों के जरिए इस पूरे घोटाले को अंजाम दिया गया था।
ऑडिटरों ने जब वेतन विभाग से 2015 से 2020 तक वेतन के वाउचरों की जानकारी मांगी तो 59 जवानों को वाउचर से भुगतान का खुलासा हुआ, वहीं लाखों के भुगतान वाले करीब 14 जवानों के वाउचर ही गायब मिले। इसके अलावा वाहन भत्ता और राशन भत्ता आदि की भी फर्जी एंट्री कर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया था। जांच में एजी और ट्रेजरी ऑफिस से वेतन संबंधित काफी रिकॉर्ड भी गायब मिला था।
मामले का खुलासा होने के बाद 25 फरवरी 2020 को आईपीसी 201, 409, 420, 467, 468, 471, 477-ए, 120-बी सहित प्रीवेंशन ऑफ क्रप्शन एक्ट 7(बी), 13(1) (बी) व 13(2) के तहत केस दर्ज किया गया था। इस मामले में जांच के लिए एसआईटी गठित की गई जिसमें क्राइम ब्रांच को भी शामिल किया गया। जांच टीमों ने कार्रवाई करते हुए विभाग के सहायक कर्मी बलविंद्र कुमार सहित एक अन्य वॉलंटियर सुरजीत सिंह को गिरफ्तार किया था।
वेतन के अलावा भी खाते में डाले गए रुपये
दिसंबर 2019 में पता चला कि 39 पुलिसकर्मियों को उनके वास्तविक वेतन से अधिक राशि वितरित की गई थी। इन 39 पुलिसकर्मियों में से हेड कांस्टेबल गुरमेल सिंह के खाते में वर्ष 2018 और 2019 के दौरान कई महीने तक अतिरिक्त राशि क्रेडिट की गई थी। उनके खाते में 11 जून 2019 को 1,18,057 रुपये डाले। खाते में यह राशि डालने से पहले 02 जून 2019 को फर्जी लिखित आदेश जारी किए गए थे। पूछताछ के दौरान अकाउंट ब्रांच की ई-7 शाखा द्वारा इस तारीख में क्रेडिट का कोई आदेश नहीं दिया गया था। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, यह बात भी सामने आई कि आरोपी बनाए गए पुलिसकर्मी राजबीर सिंह को वेतन डालने की ड्यूटी दी गई थी और उसने अन्य लोगों के साथ मिलकर वर्ष 2019 के दौरान चंडीगढ़ पुलिस के 10 कर्मचारियों को अनुचित लाभ पहुंचाया।
12 से अधिक आरोपी गिरफ्तार, कई को उठाने की तैयारी
इस मामले में एसआईटी अब तक 12 से अधिक पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें से कई को जमानत भी मिल गई है। एसआईटी ने कोर्ट में कई आरोपियों का चालान भी पेश कर दिया है लेकिन फर्जी बिलों पर किए गए हस्ताक्षरों से मिलान के लिए गिरफ्तार आरोपियों में से कई के हस्ताक्षरों के सैंपल सीएफएसएल भेजे गए हैं। लैब से जांच रिपोर्ट नहीं आने के कारण पुलिस कोर्ट में अभी तक सप्लीमेंट्री चालान नहीं पेश कर पाई है। मामले में जल्द ही जांच टीमों द्वारा दो अन्य पुलिसकर्मियों को भी गिरफ्तार किया जा सकता है।
कोई भी आरोपी देश नहीं छोड़ सकता
इस मामले में नामजद एक आरोपी पुलिसकर्मी के अधिवक्ता संदीप गुज्जर व अमरजीत चौधरी ने बताया कि इस प्रकरण में सारे बिल बिल मैन्युअल और सॉफ्टवेयर के माध्यम से तैयार किए गए थे। वेतन अनुभाग के सभी कर्मचारियों को जांच टीमों की ओर से एक-एक करके बलि का बकरा बनाया जा रहा है। इस मामले में आरोपियों को हाईकोर्ट व सेशन कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। हालांकि जांच टीम ने अभी मामले में सीएफएसएल की रिपोर्ट नहीं आने के कारण सप्लीमेंट्री चालान कोर्ट में पेश नहीं किया है। वहीं कोर्ट के आदेशानुसार मामले में नामजद कोई भी पुलिस कर्मी देश छोड़कर नहीं जा सकता है। हर तारीख पर कोर्ट में पेश होना होगा।