मोहाली। 32.57 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में सतिंदर कुमार और उसकी पत्नी तृप्ता पुंज ने सीबीआई अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया है। इस मामले में दोनों ने सीबीआई अदालत में सात फरवरी 2025 को जमानत याचिका दायर की थी, जिसको आत्मसमर्पण के बाद अदालत ने मंजूर कर लिया है। गौरतलब है कि सीबीआई ने श्री साईं कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के अध्यक्ष सतिंदर कुमार और सह-आरोपी उनकी पत्नी तृप्ता पुंज (कंपनी निदेशक) के खिलाफ वर्ष 2022 में धोखाधड़ी की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। सीबीआई के सरकारी वकील ने सुनवाई दौरान जमानत के विरुद्ध लिखित जवाब दाखिल नहीं किया। उन्होंने अदालत को बताया कि दोनों पहले ही जांच में शामिल हो चुके हैं लेकिन उन्हें सीबीआई ने कभी गिरफ्तार नहीं किया। आरोपियों के वकील ने कहा कि वर्तमान एफआईआर दर्ज होने के बाद आवेदकों को सीबीआई ने जांच में शामिल होने के लिए बुलाया था और वे इसमें शामिल हुए। वकील ने आगे कहा कि सीबीआई पंजाब के विशेष न्यायाधीश ने 7 फरवरी 2025 के आदेश के तहत आरोपियों को सात दिन के भीतर ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश होने या आत्मसमर्पण करने और नियमित जमानत के लिए आवेदन करने का निर्देश दिया था। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ने फैसला सुनाया कि आवेदकों को भौतिक हिरासत में लिया गया है। दोनों ने सीबीआई जांच के दौरान सहयोग किया है। जांच एजेंसी ने अभियुक्तों को गिरफ्तार करने का विकल्प नहीं चुना और जांच पूरी होने पर अभियुक्तों को गिरफ्तार किए बिना अदालत में चालान दायर किया गया है, तो ऐसी स्थिति में उन्हें शर्तों के अधीन जमानत पर रिहा किया जा रहा है।
क्या था मामला
पीएनबी हमाल शाखा जिला पठानकोट की प्रबंधक नेहा ने साई पॉलिटेक्निक और फार्मेसी कॉलेज और अन्य के खिलाफ सीबीआई को 3 अक्टूबर 2020 में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत के अनुसार श्री साईं कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी एक सोसाइटी है। यह सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के तहत पंजीकृत है। सतिंदर कुमार पुंज सोसाइटी के अध्यक्ष हैं और उनकी पत्नी तृप्ता पुंज प्रबंध निदेशक हैं। आरोप है कि ओडी को 216 कनाल 27 मरले वाली भूमि के गिरवीनामें के खिलाफ मंजूरी दी गई थी, जिसमें 10 टाइटल डीड शामिल थे, जिसकी रिजर्व वेल्यू 10 मई 2018 की वेल्युएशन रिपोर्ट के अनुसार 41.27 करोड़ रुपये थी। इसमें 1 टाइटल डीड तृप्ता पुंज के नाम पर थी। यह सेल डीड 23 कनाल 3 मरले वाली जमीन के लिए थी, धोखाधड़ी के साथ इसे बदल कर 83 कनाल 3 मरले कर दिया गया था। दोनों ने उक्त जमीन के संबंध में झूठा हलफनामा पेश किया था।