फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक शिक्षक, जिन्होंने विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल नॉलेज देने के लिए अपनी कार को बना दिया साइंस लैब

Mon, 29 Jul 2019 10:51 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली
विज्ञापन
टीचर डॉ. जसविंदर सिंह
विज्ञापन
एक टीचर जिसे जुनून है स्टूडेंट्स को किताबी ज्ञान से ऊपर उठकर प्रैक्टिकल नॉलेज देने का। इस जुनून को पूरा करने के लिए अपनी कार को ही मोबाइल साइंस लैब बना दिया। स्टूडेंट्स के लिए एक हजार से ज्यादा एग्जीबिशन लगा चुके ये टीचर हैं डॉ. जसविंदर सिंह। दो बार राष्ट्रपति से सम्मानित हो चुके डॉ. सिंह के नाम कई नेशनल और स्टेट अवार्ड हैं। 8वीं क्लास से लेकर एमएससी तक के स्टूडेंट्स के लिए इनके पास साइंस प्रैक्टिकल का खजाना हैं।
विज्ञापन


कंप्यूटर नेटवर्किंग में पीएचडी कर चुके फिजिक्स के लेक्चरार डॉ. जसविंदर सिंह मानते हैं कि साइंस एक रोचक विषय है, जिसे किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। आज फिजिक्स, बायोलॉजी और मैथ के स्टूडेंट्स किताबी ज्ञान तक सीमित होते जा रहे हैं। स्टूडेंट्स को साइंस की रोचकता बताने और उन्हें प्रैक्टिकल नॉलेज दे कामयाब बनाने के लिए डॉ. जसविंदर सिंह ने वर्ष 2012 में अपनी कार को मोबाइल साइंस लैब का रूप दे दिया।

डॉ. सिंह का कहना है कि स्टूडेंट्स को किताबी ज्ञान देने से ज्यादा जरूरी है कि उन्हें प्रयोग करके दिखाया जाए। इससे बच्चों के दिमाग पर बेहतर असर होता है और उनकी सीखने की प्रक्रिया बेहतर होती है। डॉ. सिंह स्टूडेंट्स को वैक्यूम, दबाव की अवधारणा, पॉस्कल लॉ, सोलर पंप, न्यूटन फ्रेडल रेडियो दूरबीन, लेजर तकनीक, इलैक्ट्रिसिटी, लाइट, मैगनेट, इलैक्ट्रोमैग्नेट के एक्सपेरिमेंट करके दिखाते हैं और उनसे भी करवाते हैं।
विज्ञापन


 
विज्ञापन

‘विज्ञान एक कमाल’ नाम से उन्होंने एक साइंस किट तैयार की है। फिजिक्स और बायोलॉजी के 36 एक्सपेरिमेंट करने वाली ये किट महज 50 रुपये में तैयार हो जाती है। इसी तरह उन्होंने ‘गत्ते से गणित’ नाम से एक मैथ किट तैयार की है। इससे मैथ के पेचीदा फार्मूलों को सहजता से हल किया जाता है। वर्ष 2001 से 2013 तक 11 बार स्टेट साइंस अवार्ड से सम्मानित हो चुके डॉ. जसविंदर सिंह को 28 फरवरी 2013 को केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी द्वारा सम्मानित किया गया। इसमें उन्हें एक लाख की नकद राशि मिली।

इस राशि को उन्होंने अपनी मोबाइल साइंस लैब को अपग्रेड करने पर खर्च किया। 29 मई 2017 को उन्हें मालती ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। तत्कालीन राष्ट्रपति प्रवण मुखर्जी ने उन्हें यह पुरस्कार दिया। इससे पहले 5 सितंबर 2014 को उन्हें राष्ट्रपति द्वारा बेस्ट साइंस टीचर के नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया गया। 5 सितंबर 2010 को उन्हें स्टेट अवार्ड से नवाजा गया था। 8 फरवरी 2013 को डॉ. जसविंदर सिंह को पंजाब शिक्षा रत्न के पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

डॉ. जसविंदर सिंह की परवरिश एक सामान्य परिवार में हुई। उनके पिता बैंक मुलाजिम थे। चार भाई-बहनों में सबसे बड़े जसविंदर सिंह बताते हैं कि पिता का पूरा जीवन किराए के मकान में बीता। रिटायर होने के बाद जो फंड मिला उससे घर खरीदना मुश्किल था। जितना फंड था उतना ही लोन ले अपना घर खरीदा। जसविंदर के छोटे भाई भी शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हैं। दोनों भाइयों ने अपनी शादियों में दहेज न लेने का फैसला किया और दोनों की शादियां गुरुद्वारा साहिब में सादे ढंग से हुईं।

डॉ. जसविंदर सिंह बताते हैं कि उनके टीचर बलदेव सिंह प्यासा ने उन्हें किताबी ज्ञान से आगे जाकर प्रैक्टिकली सीखने के लिए प्रेरित किया। गुरु की इसी सीख ने उन्हें नई दिशा दी। जसविंदर सिंह कहते हैं कि जब रोटी, कपड़ा और मकान की जरूरतें पूरी हुईं तो समाज के लिए कुछ करने की चाह ने यह राह दिखाई। पटियाला जिले के गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल शेखूपुर में बतौर फिजिक्स लेक्चरार सेवाएं दे रहे डॉ. जसविंदर सिंह अभी तक 1057 साइंस एग्जीबिशन लगा चुके हैं।

पंजाब के अलावा उनकी ये एग्जीबिशन यूपी, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, हिमाचल, चंडीगढ़ और जम्मू एंड कश्मीर में लगी हैं। उत्तर भारत के नामवर स्कूलों और यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स को डॉ. सिंह प्रैक्टिकल करवाकर साइंस की पेचीदगियों का आसान हल सिखा चुके हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें