मोहाली। शहर की नगर निगम को इस हफ्ते मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर मिल जाएंगे। सोमवार को मेयर और पार्षदों की शपथ संबंधी एजेंडा जारी होगा। साथ ही वीरवार को चुनाव की प्रक्रिया होगी, क्योंकि एजेंडा जारी होने के बाद 72 घंटे का नोटिस होता है। इसके साथ ही मेयर पद को लेकर कांग्रेस की राजनीति गर्माई हुई है। एक तरफ जहां सेहत मंत्री के भाई एवं वार्ड नंबर-10 के पार्षद अमरजीत सिंह जीती सिद्धू का नाम सबसे आगे चल रहा है। साथ ही वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं तीन बार पार्षद चुनाव जीत चुके रिशव जैन ने मेयर पद पर अपनी दावेदारी पेश की है। उनका कहना है कि उन्होंने यह दावा वरिष्ठता के आधार पर पेश किया है। इतना ही नहीं उनकी पत्नी भी लगातार चौथी बार जीती हैं। पार्टी हाईकमान जो भी फैसला लेगी वह उन्हें मंजूर होगा।
जानकारी के मुताबिक मोहाली नगर निगम के चुनाव में कांग्रेस ने दस साल बाद शानदार तरीके से वापसी की है। निगम चुनाव में कांग्रेस ने 50 सीटों में 37 सीटों पर कब्जा किया है। 11 सीटें आजाद ग्रुप और दो सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीती हैं। शिरोमणि अकाली दल और भाजपा चुनाव में खाता तक नहीं खोल पाई है। चुनाव से पहले से कांग्रेस की तरफ से यह संकेत दिए जा रहे थे कि सेहत मंत्री के भाई अमरजीत सिंह जीती सिद्धू मेयर होंगे। इस बात को मजबूती इस बात से भी मिली थी जब कांग्रेस द्वारा फेज-1 में अपने उम्मीदवार घोषित किए तो वहां पर जीती सिद्धू का बड़ा होर्डिंग लगाया गया था। इसी तरह शहर में भी होर्डिंग लगे थे। इतना ही नहीं जीती सिद्धू की अगुवाई में कई पार्षदों के इलाके में प्रचार हुआ था। वहीं, जिस हिसाब से चुनाव नतीजे आए हैं, उससे कांग्रेस उत्साहित है। हालांकि एक बात साफ है कि कांग्रेस के अंदर जंग जरूर चल रही है। जैन दंपती ने खुलकर अपनी दावेदारी पेश की है। पूर्व मेयर कुलवंत सिंह को चुनाव हराने वाले अमरीक सिंह सोमल और राजिंदर राणा के नाम भी मेयर पद की दौड़ में चल रहे हैं। वहीं, सूत्रों की मानें तो कांग्रेस सभी को संतुष्ट करने में लगी हुई है। क्योंकि अगले वर्ष विधानसभा चुनाव हैं। ऐसे में सेहत मंत्री किसी भी तरह का खतरा उठाना नहीं चाहते हैं।
नयगांव में आजाद और भाजपा पार्षद तय करेंगे प्रधान
नयागांव में भी नगर परिषद प्रधान को लेकर जंग रोमांचक हो गई। चुनाव में अकाली दल ने 10, कांग्रेस ने 6, भाजपा ने 3 एवं निर्दलीय ने 2 सीट जीती थी। अकाली दल एवं कांग्रेस दोनों ही जोड़तोड़ के साथ अपना-अपना प्रधान बनाने की कोशिशों में लगे हैं। यहां पर नगर परिषद प्रधान पद को महिलाओं समेत अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए रिजर्व है। यहां पर दोनों ही दल भाजपा के 3 एवं आजाद के 2 पार्षदों पर निर्भर है। प्रधान पद के लिए कुल 11 पार्षदों की जरूरत पड़ेगी। इस प्रकार अकाली दल को सिर्फ एक, जबकि कांग्रेस को पांच पार्षदों के जोड़तोड़ की जरूरत है।