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Mohali News: समगौली कूड़ा निस्तारण प्लांट पर सियासी पेंच, आप के दो विधायक आमने-सामने

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मोहाली। शहर में कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। नगर निगम सदन ने समगौली में कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट लगाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया। हालांकि, इस परियोजना को लेकर आम आदमी पार्टी के दो विधायक आमने-सामने आ गए हैं। डेराबस्सी के विधायक कुलजीत सिंह रंधावा ने दूसरे इलाकों का कूड़ा अपने क्षेत्र में लाने का विरोध किया है।
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सोमवार को महापौर सरबजीत सिंह समाना की अध्यक्षता में हुई सदन की बैठक में यह प्रस्ताव पास किया गया। इसके तहत एचपीसीएल रिन्यूएबल एंड ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के साथ समझौता किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य नगर निगम ठोस कचरे का उपयोग कर सीबीजी तैयार करना है। इससे कूड़े के वैज्ञानिक निस्तारण के साथ ऊर्जा उत्पादन भी संभव हो सकेगा। मोहाली में लंबे समय से कूड़े के उठान और निस्तारण को लेकर शिकायतें मिल रही हैं। शहर के बाजारों और रिहायशी इलाकों में कूड़े के ढेर लगने की समस्या बनी हुई है। यह प्लांट इस समस्या का स्थायी समाधान प्रदान कर सकता है। मोहाली के विधायक कुलवंत सिंह इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय हैं।



डेराबस्सी विधायक का कड़ा विरोध

डेराबस्सी विधायक कुलजीत सिंह रंधावा ने समगौली में प्रस्तावित प्लांट का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपने हलके में बाहर का कूड़ा नहीं आने देंगे। रंधावा ने कहा कि उनके क्षेत्र के लोगों पर दूसरे इलाकों के कूड़े का बोझ नहीं डाला जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों की कीमत पर दूसरे क्षेत्रों की कूड़े की समस्या का समाधान नहीं होगा। विधायक रंधावा ने मांग की है कि प्लांट में किन क्षेत्रों का कूड़ा आएगा, यह स्थिति पहले स्पष्ट की जाए।
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परियोजना का उद्देश्य और लाभ

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य मोहाली की बढ़ती कूड़े की समस्या का समाधान करना है। प्लांट में नगर निगम ठोस कचरे का उपयोग कर संपीड़ित बायोगैस बनाई जाएगी। यह कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के साथ-साथ ऊर्जा उत्पादन का एक स्थायी तरीका है। शहर में कूड़े के ढेर लगने की शिकायतों को देखते हुए यह एक महत्वपूर्ण पहल है। केवल कूड़ा एक जगह से दूसरी जगह ले जाने से समस्या का स्थायी हल नहीं होता। यह प्लांट शहर के लिए एक अहम परियोजना साबित हो सकती है।



भविष्य की चुनौतियां

परियोजना की सफलता कई बातों पर निर्भर करेगी। प्रशासन को प्लांट की क्षमता निर्धारित करनी होगी। यह भी स्पष्ट करना होगा कि इसमें किन क्षेत्रों का कूड़ा पहुंचेगा। आसपास के गांवों के लोगों की चिंताओं का समाधान करना भी एक बड़ी चुनौती होगी। सदन से प्रस्ताव पास होने के बाद अब इन सवालों के जवाब तलाशना प्रशासन के लिए आवश्यक है। इन चुनौतियों का समाधान ही परियोजना की राह आसान करेगा।
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