मोहाली। फेज-छह स्थित सिविल अस्पताल में इन दिनों इलाज करवाने आने वाले लोग परेशान हो रहे हैं। सिविल अस्पताल में इलाज से पहले कोरोना टेस्ट करवाना जरूरी कर दिया गया है।
इतना ही नहीं रिपोर्ट निगेटिव आने पर किसी अन्य बीमारी का इलाज संभव है। इस चक्कर में कई बीमार लोगों को मजबूरी में निजी अस्पताल जाना पड़ता है। इसके अलावा कुछ निराश होकर घर लौट रहे हैं।
सिविल अस्पताल प्रबंधन की तरफ से यह फैसला उस समय लिया गया है, जब अस्पताल के कई डॉक्टर कोरोना संक्रमित हो रहे थे। इससे अस्पताल का काम प्रभावित हो रहा था। लोगों का कहना है कि सिविल अस्पताल के इस फैसले से लोग परेशान हो रहे हैं। क्योंकि कोरोना टेस्ट के बाद रिपोर्ट का इंतजार करना पड़ता है। दूसरी तरफ निजी अस्पतालों में इलाज काफी महंगा है। खरड़ निवासी जगदीप सिंह ने बताया कि उन्हें हलका बुुखार था। वह दवाई लेने के लिए सिविल अस्पताल गए तो उन्हें पता चला कि यहां कोरोना टेस्ट के बाद ही इलाज हो पाएगा। मजबूरी में वह एक नामी निजी अस्पताल में गए। उन्होंने जाते ही सारे टेस्ट करवा दिए। इस पर करीब एक हजार रुपये खर्च हो गए। इसके बाद उन्हें उन्हें 300 रुपये की दवाईयां पकड़ा दी गईं।
जगदीप सिंह का कहना है कि हर व्यक्ति की स्थिति एक जैसी नहीं है। प्रशासन को लोगों की मजबूरी समझनी चाहिए। सिविल सर्जन डॉ. आदर्श पाल कौर ने कहा कि डॉक्टरों की सेहत को ध्यान में रखकर इस संबंधी फैसला लिया गया है। लोगों को इसे समझना चाहिए।