मोहाली। राज्य सरकार की ओर से इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बिल्कुल साथ लगते एरिया में करीब 10 साल पहले सिंगापुर की तर्ज पर एरोसिटी से लेकर आईटी सिटी बसाई गई थी। लोगों ने करोड़ों रुपये खर्च करके यहां अपने सपनों के घर बनाए। लोग कई तरह के टैक्स भी लगातार सरकार को चुकाते आ रहे हैं। लेकिन अभी तक भी लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। न तो इलाके में किसी ट्रांसपोर्ट की सुविधा है और न ही इलाज करवाने के लिए कोई डिस्पेंसरी। इतना ही नहीं इलाके में कोई पुलिस चौकी तक नहीं है। इस वजह से रोजाना लोगों को दिक्कत उठानी पड़ रही है। इलाके के लोगों का कहना है कि विधानसभा चुनाव के लिए जो भी उम्मीदवार प्रचार के लिए आ रहे हैं, उन्हें साफ कह दिया गया है कि इन दिक्कतों से राहत दिलाई जाए। सभी राजनेताओं ने उन्हें आश्वासन दिया है कि इन सभी मुद्दों को अपने चुनावी मुद्दों में शामिल करेंगे। साथ ही इन्हें पहल के आधार पर दूर करेंगे।
जानकारी के मुताबिक सरकार ने 2010 में एरोसिटी और आईटी सिटी बसाना शुरू की थी। यह इलाका इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नजदीक होने की वजह से देेश के ही नहीं विदेशों में रहने वाले लोगों ने भी यहां पर निवेश किया था। करीब 25 हजार लोग इस एरिया में रह रहे हैं। लेकिन अभी तक लोगों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। लोगों के मुताबिक चंडीगढ़ समेत ट्राइसिटी को उनके एरिया से होते हुए गैस पाइप लाइन बिछी थी। सब जगह गैस पाइप लाइन से सप्लाई शुरू हो गई, लेकिन अभी तक उन्हें पाइप लाइन से गैस की सुविधा नहीं मिल रही है। इसी तरह यहां पर पहली बार गमाडा ने अंडरग्राउंड बिजली की तार बिछाई थी। बाद में यह काम पावरकॉम को सौंप दिया गया था। लेकिन पावरकॉम के पास अंडरग्राउंड बिजली की लाइनों को ठीक करने का अनुभव नहीं है। ऐसे में अगर वहां पर बिजली की लाइन में दिक्कत आ जाती है, तो कम से कम आठ घंटे तक बिजली कट का सामना करना ही पड़ता है। इसी तरह इलाके में एटीएम की सुविधा नहीं है और पुलिस का सुरक्षा घेरा भी मजबूत नहीं है। इसके अलावा सड़कों और पार्कों में लावारिस पशु हर समय मुंह मारते हैं। जिससे रोजाना लोगों को दिक्कत उठानी पड़ती है।
आईटी सिटी की हालात गांव से बदतर
एरोसिटी के साथ ही आईटी सिटी बसाई गई है। लेकिन इलाके के लोगों की मानें तो इस एरिया से तो गांव भी अच्छे हैं। वहां पर सभी सुविधाएं तो मिलती हैं, लेकिन आईटी सिटी में ऐसा कुछ नहीं है। अगर शाम 5 बजे इलाके में लाइट चली जाए तो बिजली की मरम्मत ही नहीं की जाती है। इलाके में कोई भी वेरका का बूथ तक नहीं है। दूध लेने के लिए पांच किलोमीटर जाना पड़ता है। लावारिस पशु हर समय मुंह मारते रहते हैं। अभी तक सीवरेज सिस्टम उचित तरीके से काम नहीं कर रहे हैं। जिससे गंदगी सड़कों पर रहती है। इंटरनेट के लिए भी लोगों को दिक्कत उठानी पड़ रही है। अभी तक ब्राडबैंड की सुविधा भी नहीं है।
क्या कहते हैं स्थानीय लोग
नाम के शहरी, हालत काफी खराब
इलाके के लोगों ने लाखों रुपये खर्च करके यहां पर मकान बनाए थे, लेकिन लगता ही नहीं कि वह मोहाली जैसे शहर में रह रहे हैं। सभी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। लोग सरकारी विभागों के चक्कर काटकर हार गए हैं। चुनावी मैदान में उतरे नेताओं को लोगों की दिक्कतों को समझना होगा। -कुलतार सिंह, ज्वाइंट सेक्रेटरी, आईटी सिटी।
सीवरेज सिस्टम की समस्या गंभीर
इलाके में सीवरेज सिस्टम की समस्या गंभीर है। लावारिस पशुओं की वजह से लोग परेशान हैं और सड़कों की हालत खराब है। प्रशासन को पहल के आधार पर इन्हें संवारना होगा। तभी लोगों को राहत मिल पाएगी। -एचएस मान, प्रधान आईटी सिटी।
इलाके में पुलिस का पहरा कमजोर
एरोसिटी में चोरी की वारदातें लगातार बढ़ रही हैैं। यहां पर वारदातें होने से लोगों को काफी दिक्कत उठानी पड़ रही है। चोर वाहनों को अपना निशाना बना रहे हैं। पुलिस को इलाके में रात-दिन गश्त बढ़ानी होगी। -परगट सिंह, निवासी एरोसिटी।
मूलभूत सुविधाएं दे सरकार
एरोसिटी एरिया में रहने वाले लोगों की सुविधा के लिए एक तो डिस्पेंसरी स्थापित होनी चाहिए। साथ ही दूध के बूथ और लाइब्रेरी आदि की सुविधा दी जानी चाहिए। जिससे लोगों को दिक्कत न उठानी पड़े। -सज्जन सिंह, निवासी एरोसिटी।