मोहाली। भूमि अधिग्रहण के मुआवजे से जुड़े मामले में मोहाली की अदालत ने गमाडा के लैंड एक्विजिशन कलेक्टर (एलएसी) रोहित जिंदल पीसीएस के खिलाफ अवमानना कार्रवाई का रास्ता साफ कर दिया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश टीपीएस रंधावा की अदालत ने कहा कि स्पष्ट आदेश के बावजूद मुआवजे की पूरी राशि जमा नहीं की गई और कोर्ट रिकॉर्ड में पेश एलए-7 व एलए-9 में राशि बदली गई। अदालत ने इसे आदेशों की खुली अवहेलना माना और याचिकाकर्ताओं को अलग कंटेंप्ट याचिका दायर करने की छूट दी।
मामला मोतीयाज रॉयल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड बनाम गमाडा का है। 10 फरवरी 2026 को कोर्ट ने 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून की धारा 77(2) के तहत पूरी राशि जमा कराने के आदेश दिए थे। 25 मार्च को गमाडा ने 15 दिन मांगे, लेकिन एलएसी रोहित जिंदल ने राशि जमा करने के बजाय स्पष्टीकरण का हलफनामा दाखिल किया। 21 मई 2026 को उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी हुआ।
एलएसी ने कहा कि स्वीकार्य मुआवजा 1,24,81,455 रुपये था और गमाडा 3,05,33,313 रुपये जमा कर चुका है। कोर्ट ने पाया कि मूल एलए-7 में राशि 4,06,09,241 रुपये थी, जिसे बाद में 1,25,81,455 रुपये कर दिया गया। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड किसके आदेश पर बदला गया, स्पष्ट नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि मुआवजा अवार्ड के आधार पर दिया जाता है। अवार्ड नंबर 569 दिनांक 18 मई 2018 में 6 फरवरी 2015 की सरकारी नीति का उल्लेख नहीं है। 10 जुलाई 2021 और 15 मई 2023 की पिछली कार्यवाहियों का भी अदालत ने उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि 10 फरवरी और 21 मई 2026 के आदेशों को चुनौती नहीं दी गई और वे अंतिम हैं।
अदालत ने रोहित जिंदल के खिलाफ कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट की धारा 10 सहपठित धारा 12 के तहत प्रथम दृष्टया मामला माना। हालांकि अंतिम सजा नहीं सुनाई गई है। मुआवजा राशि जारी करने के मुद्दे पर अगली सुनवाई 30 अक्टूबर 2026 को होगी।