मोहाली। सीबीआई की विशेष अदालत ने एक आईबी निरीक्षक को सीबीआई अधिकारी बनकर विचाराधीन कैदियों से वसूली करने और निर्दोष लोगों को झूठे मामलों में फंसाने के आरोप में एक साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। सीबीआई के लोक अभियोजक ने बताया कि विशेष सीबीआई न्यायाधीश की अदालत ने दोषी हरप्रीत सिंह उर्फ एचएस संधू पर पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। दोषी को सजा सुनाए जाने के जमानत पर रिहा कर दिया गया है। अब दोषी को 60 दिन के भीतर उच्च न्यायालय में अपील करना होगा।
सीबीआई के लोक अभियोजक ने बताया कि शिकायतकर्ता ने हरप्रीत के खिलाफ सीबीआई से शिकायत की थी कि हरप्रीत अपने सहयोगी विकास भारती के माध्यम से 70 हजार रुपये मांग रहा है। नहीं देने पर सीबीआई के गिरफ्तार करने का डर दिखाया गया है। सीबीआई ने मामले का पर्दाफाश किया और विकास को हरप्रीत के नाम पर 70 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। मुकदमे के दौरान हरप्रीत के खिलाफ पीसी एक्ट के आरोप साबित नहीं हुए, लेकिन विकास, जिसे इस मामले में पहले ही पीओ घोषित किया जा चुका है, अभी भी गिरफ्त से बाहर है। यह मामला जुलाई 2016 में दर्ज किया गया था। इसके बाद जनवरी 2017 में आरोप पत्र दाखिल किया गया। उसके बाद जून 2019 में मामले में आरोप तय किए गए। अदालत ने हरप्रीत को तीन महीने के कठोर कारावास और 5000 रुपये के जुर्माने के साथ एक साल की सजा सुनाई है।