फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मोहाली : कोविड काल में ड्यूटी दे रहीं नर्सों ने साझा किए अनुभव.. कहा- शहरवासी तंदुरुस्त रहें, इसलिए महीनों से डटी हैं मोर्चे पर

विज्ञापन
विज्ञापन
मोहाली। जैसे किसी परिवार में एक मां की भूमिका होती है, ठीक वैसे ही अस्पताल में एक नर्स अपनी जिम्मेदारी निभाती है। कोरोना काल में उनके कंधों पर जिम्मेदारी काफी बढ़ गई है। कोरोना की टेस्टिंग से लेकर वैक्सीनेशन तक में अपनी भूमिका निभा रही हैं। महीनों से वह लगातार ड्यूटी दे रही हैं। यहां तक कि इस समय वह अपने परिवार से भी दूरी बनाकर चल रही हैं। अस्पताल में मरीजों को समय से दवाई देनी हो या फिर उनमें जिंदगी जीने का हौसला बढ़ाना हो तो एक नर्स के अलावा कोई दूसरा यह जिम्मेदारी नहीं निभा सकता। जिले की कुछ ऐसी नर्सों से आपको रूबरू करवा रहे हैं, जो कोरोना काल में मोर्चे पर डटी हुई हैं।
विज्ञापन

कोरोना को हराकर दोबारा संभाला मोर्चा
फेज-6 सिविल अस्पताल की 50 वर्षीय हेड नर्स परमिंदर कौर ने बताया कि उनकी ड्यूटी ज्यादा इमरजेंसी में ही होती है। कोरोना वायरस के शुरू होने से पहले मरीज चोट और गंभीर बीमारियों की हालात में अस्पताल पहुंचते थे, लेकिन आज के हालात काफी गंभीर हैं। मरीज के साथ-साथ खुद का भी ध्यान रखना पड़ता है। डबल मास्क ग्ल्वज और अन्य गाइडलाइन का पालन कर मरीजों की देखभाल करती हैं। इन सबके बावजूद मैं अप्रैल में कोरोना पॉजिटिव आई। लेकिन जैसे ही मैंने रिकवर किया मैं अपनी ड्यूटी पर वापस लौट आई हूं और लगातार काम में डटी हुई हूं।
मरीजों का इलाज ही नहीं, उन्हें मोटिवेट भी करती हूं
फेज-6 सिविल अस्पताल की सीनियर नर्स 50 वर्षीय वंदना ने बताया कि पिछले लंबे समय से वे अस्पताल में लगातार ड्यूटी दे रही हैं। दिनरात अस्पताल आने वाले मरीजों से घिरी रहती हैं। उन्होंने बताया कि इलाज तो करना उनका काम है। लेकिन वह हर मरीज को जल्दी रिकवर होने के लिए मोटिवेट करती हैं। मरीज भी नर्स के कहे शब्दों पर पूरा ध्यान देते हैं। मरीजों की देखभाल के चक्कर में कई बार अपने घर के काम तक रह जाते हैं।
विज्ञापन

पिता के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद भी निभाई ड्यूटी पर आकर जिम्मेदारी
सिविल अस्पताल में सीनियर नर्स समिता ने बताया कि पिछले तीन महीनों से उन्हें कोई छुट्टी नहीं मिली है। वह लगातार काम कर रही हैं। इस बीच उनके पिता भी कोरोना के चपेट में आ गए थे। लेकिन वह अपनी ड्यूटी पर डटी रहीं। कोरोना के संक्रमण की दूसरी लहर में मरीज नाजुक स्थिति से होकर गुजर रहे हैं। उनकी देखभाल के लिए हम लोग दिन रात ड्यूटी दे रहे हैं। वहीं मरीज को कोई भी तकलीफ होती है तो डॉक्टर की जगह नर्स को ही आवाज लगाता है। वहीं परिवार के सदस्य भी हमसे दूरी बनाए रखते हैं। जो कई बार तकलीफ देता है।
अपनी जान की परवाह किए बिना जुटती है सेवा में
नर्स कमल ने बताया कि सिविल अस्पताल में डॉग बाइट केस रोजाना आते हैं। कुछ मरीजों को बुरी तरह काटा होता है। ऐसे में उन्हें इंजेक्शन देना और पट्टी करने का जिम्मा मुझ पर है। कोरोना काल में जहां हर कोई मरीज के पास जाने से डरता है, वहीं पिछले एक साल में मैं हजारों मरीजों को अकेले ही इंजेक्शन लगा रही हूं। इस दौरान मैंने अपना भी ध्यान रखा, क्योंकि हमारी उम्र ज्यादा होने से संक्रमण से रिकवर होने में काफी समय लग सकता है और माना जाता है कि कोरोना की दूसरी लहर पहले से ज्यादा खतरनाक है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें