मोहाली। शहर को अतिक्रमण मुक्त कराने का जिम्मेदार नगर निगम पहले ही आवारा कुत्तों और संरक्षित पशुओं की परेशानी से लोगों को निजात दिलाने में फेल साबित हुआ है। अब नगर निगम को बंदरों को पकड़ने की भी जिम्मेदारी मिल गई है। वन विभाग के इनकार करने के बाद अब नगर निगम का कहना है कि उनके पास बंदर पकड़ने के लिए कुशल स्टॉफ नहीं है। लोगों को इस समस्या से निदान दिलाने के लिए टेंडर कॉल कर दिया है।
लोगों का कहना है कि नगर निगम पहले ही आवारा कुत्तों और संरक्षित पशुओं की समस्या से नहीं निपट पा रहा है, अब बंदरों की समस्या से शहर के लोगों को कैसे निजात दिलाएगा। लोगों के अनुसार फेज-2, 7 के अलावा फेज-10 में पिछले कई दिनों से बंदरों ने आतंक मचा रखा है। सबसे ज्यादा परेशानी फेज-7 के लोगों को हो रही है। बंदर लोगों के घरों के अंदर दाखिल होकर नुकसान पहुंचा रहे हैं। यही नहीं इनको भगाने की कोशिश करने वाले लोगों पर यह हमला करने से भी नहीं चूकते हैं। इस कारण लोगों में डर का माहौल है। घरों में घुसकर बंदर सामान बर्बाद करना, बच्चों-बुजुर्गों और महिलाओं को काटकर उनके कपड़े भी फाड़ देते हैं।
बंदरों ने मचा रखा है आतंक
फेज-7 में बंदरों ने काफी आतंक मचा रखा है। इस कारण क्षेत्र के लोग काफी परेशान हैं। इस समस्या के हल के लिए प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। -अनुराधा आनंद, पार्षद फेज-7
घर में करते हैं नुकसान
बंदरों के कारण काफी परेशानी हो रही है। छत से घरों के अंदर घुसकर बंदर भारी नुकसान करते हैं। इनसे काफी डर भी लगा रहता है कि कहीं बच्चों को काट न दें। -कमलेश रानी, फेज-10
महिला को काट चुके बंदर
फेज-2 में बंदरों की समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। फेज-2 में कुछ समय पहले बंदर महिला को भी काट चुके हैं। इस समस्या के हल के लिए प्रशासन और निगम को कई बार कहा है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है। - रजत तनेजा, दुकानदार फेज-2
पहले वन विभाग बंदरों को बचाने का काम संभालता था। वन्यजीव अधिनियम में संशोधन के कारण अब यह नगर निगम का काम है। - तजिंदर सिंह, अधिकारी, वन विभाग
नगर निगम ने बंदर पकड़ने वालों को काम पर रखने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। ये विशेषज्ञ लंगूरों की आवाज की नकल करते हैं, जिससे बंदर भाग जाते हैं। एक बार जब ये कुशल कर्मचारी काम पर लग जाएंगे, तो उम्मीद है कि समस्या का समाधान हो जाएगा। - संजीव कंबोज, एमओ, नगर निगम