शहर में घूमते संरक्षित पशु। संवाद
मोहाली। नगर निगम ने शहर में पशुओं को पकड़ने की दरों में संशोधन किया है। यह यह दरें 950 रुपये से बढ़ाकर 1,500 रुपये प्रति पशु कर दिया गया है। गत दिनों नगर निगम की बैठक में इस आशय का प्रस्ताव पास किया गया है। यह 54% की वृद्धि को दर्शाता है। पिछले ठेकेदार की समय सीमा साल 2023 में समाप्त हो गई थी। तब से इसे अस्थायी रूप से बढ़ा दिया गया था। अब निगम ने इस कार्य के लिए नए सिरे से टेंडर काल करने का फैसला लिया है।
मेयर अमरजीत सिंह सिद्धू का कहना है कि निगम शहर की सड़कों से पशुओं की समस्या को दूर करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है। पशुओं को पकड़ने, टैग करने और उनका प्रबंधन करने के लिए एक ठेकेदार को काम पर रखा गया है, जो उन्हें वापस लाने वालों पर आश्रय शुल्क और जुर्माना लगाता है। शहर में पशुओं का खतरा लगातार बना हुआ है। चंडीगढ़ से आने वाले पशु नियंत्रण प्रयासों को मुश्किल बनाते हैं। उन्होंने कहा कि नए सिरे से पशु पकड़ने का ठेका देने को लेकर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसके लिए 1500 रुपये प्रति पशु प्रतिदिन के हिसाब से रिजर्व रेट फिक्स करके नए सिरे से ईओआई से कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
एक ठेकेदार का कहना है कि उनको चंडीगढ़ में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है। इससे यह काम मुश्किल हो जाता है। इस समस्या से निपटने के लिए चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला के नगर निगमों ने पहले साल 2018 में ट्राइसिटी को-आर्डिनेशन कमेटी का गठन भी किया था, लेकिन यह फैसला आगे नहीं बढ़ पाया। दूसरी और स्थानीय निवासियों ने पशुओं की बढ़ती समस्या के कारण आ रही समस्या को लेकर चिंता प्रकट की है। फेज-11 निवासी सुनीता आहुजा के अनुसार फेज-11 में पशुओं की समस्या देखने को मिलती है। पशु सड़कों पर घूमते रहते हैं। सड़कों पर झुंड बनाकर बैठे रहते हैं। शहर के प्रवेश द्वार जगतपुरा के पास की सड़कों पर बैठे पशु हर समय बड़ी दुर्घटना का कारण बनते हैं। एयरपोर्ट रोड पर भी पशुओं की समस्या के कारण कई हादसे हो रहे हैं।