मोहाली। अब नगर निगम की वार्डबंदी की स्थिति सितंबर में साफ हो जाएगी। एक सितंबर को निकाय विभाग की तरफ से वार्डबंदी संबंधी चंडीगढ़ में मीटिंग बुलाई गई है। इस संबंधी विभाग के डायरेक्टर की ओर से पत्र जारी कर दिया गया है, जिसमें इस मीटिंग के बारे में साफ लिखा गया है। वहीं, जानकारों की मानें तो इस मीटिंग के बाद पूरी स्थिति साफ हो जाएगी। जिसके बाद शहर में वार्डबंदी करने की अगली प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
मिली जानकारी के मुुताबिक मोहाली नगर निगम की वार्डबंदी को लेकर मीटिंग पहले 24 अगस्त को स्थानीय निकाय विभाग के डायरेक्टर ऑफिस में होनी थी। इसी बीच नगर निगम के कमिश्नर कमल कुमार के एकांतवास और ज्वाइंट कमिश्नर के बीमार होने के कारण मीटिंग स्थगित कर दी गई। क्योंकि वार्डबंदी में इन दोनों अधिकारियों की भूमिका अहम थी, इनके बिना यह काम पूरा नहीं हो सकता था, ऐसे में मीटिंग को टाल दिया गया है।
बता दें कि बीते एक महीने से शहर में नगर निगम की वार्डबंदी की चर्चा चल रही है। एक बात यह भी सामने आ रही है कि मोहाली के विधायक एवं पंजाब के सेहत मंत्री बलबीर सिंह सिद्घू यह भी चाहते हैं कि नए सिरे से वार्डबंदी का काम पूरा करने के बाद नगर निगम के चुनाव करवाए जाएं। वहीं, इसको लेकर यह भी चर्चा है कि मंत्री की ओर से अपने स्तर पर वार्डबंदी का नक्शा तैयार किया जा चुका है। जिसमें गत हाउस के मेंबर रहे अकाली भाजपा दल के ज्यादातर पार्षदों के वार्डों में काफी कांट छांट की गई है। दूसरी तरफ अकाली दल और बीजेपी के नेता पहले ही साफ कर चुके हैं कि यदि उनके वार्ड पर कैंची चली तो वह मामले को अदालत में ले जाएंगे।
जीरकपुर वार्डबंदी केस की सुनवाई आज
मिली जानकारी के मुुताबिक मोहाली में वार्डबंदी के बारे में होने वाली मीटिंग अब जीरकपुर की वार्डबंदी को लेकर 27 अगस्त को होने वाली सुनवाई के बाद ही होगी। ऐसे में यह अंदाजा लगाया जा रहा था कि यह मीटिंग अगले हफ्ते होगी। जीरकपुर वार्डबंदी के केस पर भी प्रशासन की नजर है। हालांकि मोहाली में इस बार 50 ही वार्ड रहेंगे। लेकिन वार्डों के एरिया में बदलाव होगा। महिलाओं के लिए 25 वार्ड आरक्षित रहेंगे। जो कि इस बार पहली बार होना है।
चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों को लगा झटका
नगर निगम की वार्डबंदी के लिए बनाए गए बोर्ड की मीटिंग के मुलतवी होने के बाद चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों को झटका लगा है। जिन्हें लगता था कि मीटिंग से एक दो दिन पहले वार्डबंदी के बारे में जानकारी सार्वजनिक हो जाएगी और इसके बाद वह अपने वार्डों में जाकर प्रचार शुरू कर देंगे। लेकिन अब मीटिंग मुलतवी होने के चक्कर में उनका नुकसान हो गया है।