मोहाली। फेज-6 स्थित सिविल अस्पताल की जच्चा-बच्चा वार्ड के मरीजों को शौचालय के लिए एक वार्ड से दूसरे वार्ड में जाना पड़ रहा है। पीडियाट्रिक वार्ड के कुछ शौचालय में छह माह से पानी की सप्लाई बंद है। इस वार्ड के किसी शौचालय में पानी नहीं है, तो किसी शौचालय के दरवाजे में कुंडी नहीं लगती। इससे मरीजों को दूसरे वार्ड में शौच के लिए जाना पड़ता है। मरीजों को हो रही परेशानी से अस्पताल प्रशासन पर कोई असर नहीं हो रहा है। जहां मां अपने बच्चों की बीमारी से पहले परेशान है, वहीं अस्पताल प्रशासन भी उन्हें सताने में पीछे नहीं है।
पीडियाट्रिक वार्ड में कम से कम दस कमरे हैं, जिनमें से अधिकतर कमरों में मरीजों को शौचालय की अव्यवस्था के कारण परेशानी हो रही है। इन कमरों के शौचालय में किसी में पानी नहीं है, किसी का दरवाजा बंद है, किसी शौचालय में लाइट नहीं है तो किसी के दरवाजे की कुंडी नहीं लगती। इस वार्ड में एडमिट छोटे बच्चों के साथ उनकी माताओं को भी परेशानी हो रही है। इस पर मरीजों ने कई बार अस्पताल कर्मचारियों से परेशानी जाहिर की, परंतु कोई हल निकल के नहीं आ रहा है।
छह माह पहले हुआ एनआईसीयू में शॉट-सर्किट अभी तक नहीं हुआ रिपेयर
अस्पताल के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अगस्त 2023 में जच्चा बच्चा की पहली मंजिल पर स्थित एनआईसीयू में पानी की लीकेज के कारण शॉट सर्किट हुआ था। उसे रोकने के लिए टंकी से पानी की सप्लाई बंद कर दी गई। इससे दूसरी मंजिल पर स्थित पीडियाट्रिक वार्ड के रूम 203 और 204 में पानी की सप्लाई भी बंद हो गई थी। इसके बाद वार्ड के एसएमओ को एक अर्जी जारी की, परंतु उस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। शॉट सर्किट को रिपेयर किया गया और न ही पानी की सप्लाई खोली गई।
कोट्स:
बच्चे को निमोनिया हुआ है, इस कारण दस दिन से मैं अस्पताल में ही हूं। मैंने इन दस दिन में एक भी दिन शौचालय सही नहीं पाया है। शौच के लिए दूसरे वार्ड में जाना पड़ता है। उतनी देर में बच्चे को अकेले छोड़ना सबसे कठिन रहता है। जब अस्पताल प्रशासन से यह समस्या बताई तो उन्होंने भी अनसुना कर दिया।
-चिंता देवी, मरीज की माता
कोट़्स:
मेरे बच्चे की छाती जाम हाेने के कारण पिछले छह दिन से अस्पताल में ही हूं। जब से मैं अस्पताल में आया हूं हमारे कमरे के शौचालय पर ताला लगा है। कमरे में शौचालय को फायदा ही क्या अगर हमें दूसरे ही वार्ड में जाना पड़ रहा है। शौच के लिए पत्नी को दूसरे वार्ड और मुझे तीसरी मंजिल पर जाना पड़ता है।
-परवीन, मरीज के पिता
आधिकारिक कोट्स:
इस संबंध में रिपेयर का काम शुरू कर दिया है। जहां-जहां जो कमी मिलेगी, जल्द पूरा किया जाएगा।
-एचएस चीमा, एसएमओ फेज-6 अस्पताल