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Mohali News: रीजनल फॉरेंसिक लैब में विशेषज्ञ नहीं, मधुबन से कई माह बाद मिल रही जहर, विसरा, ड्रग्स की रिपोर्ट

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पंचकूला। हरियाणा पुलिस ने अपराध की जांच में तेजी लाने के लिए मोगीनंद स्थित पुलिस लाइन में रीजनल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) स्थापित किया गया है, लेकिन लैब में नवंबर से टॉक्सीकोलॉजी विसरा, ड्रग्स, जहर और अन्य के सैंपल नहीं लिए जा रहे हैं। लैब में विशेषज्ञों की कमी के कारण यह समस्या हो रही है। नवंबर से विशेषज्ञ नहीं होने के कारण टॉक्सीकोलॉजी के सैंपल लैब में नहीं लिए जा रहे थे। इसके बाद चंडीगढ़ की फॉरेंसिक लैब में सैंपल भेजा जाने लगा। चंडीगढ़ लैब में टॉक्सीकोलॉजी के अधिक सैंपल होने के कारण वहां भी सैंपल नहीं लिए जा रहे हैं। इसके बाद दोबारा करनाल की मधुबन फॉरेंसिक लैब में टॉक्सीकोलॉजी के सैंपल भेजे जा रहे हैं। रिपोर्ट आने में 4 से 6 माह का समय लग रहा है। रिपोर्ट समय पर नहीं मिलने के कारण जांच में काफी समय लग रहा है।
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पंचकूला लैब में हो रहे केवल बायोलॉजी, सेरोलॉजी की जांच

पुलिस लाइन स्थित रीजनल फॉरेंसिक साइंस लैब के असिस्टेंट डायरेक्टर सेरोलॉजी डॉक्टर सिद्दार्थ कौशिक के अनुसार एक्सपर्ट डॉक्टरों की देखरेख में लैब में सैंपल की जांच की जाती है। उन्होंने बताया कि बिसरा के विशेषज्ञ नहीं होने के कारण नवंबर से सैंपल नहीं लिए जा रहे हैं। इस बारे में आलाअधिकारियों को पिछले दिनों पत्र लिखा गया है। जल्द ही लैब में बिसरा के डॉक्टर को भेजा जाएगा। लैब मेंं बायोलॉजी और सेरोलॉजी डिविजन में विभिन्न आपराधिक मामलों से संबंधित सैंपल प्राप्त हो रहे है। उन्होंने बताया कि बायोलॉजी डिविजन में क्राइम अगेंस्ट वुमन और पॉक्सो के केस आते हैं। सेरोलॉजी में मर्डर के केस आते है। टोक्सिकोलॉजी में विसरा, ड्रग्स, जहर और ब्लड, अल्कोहल के केस आते हैं।

जल्द मिलेगा न्याय

रीजनल लैब की स्थापना का उद्देश्य वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग करके अधिक कुशल जांच प्रक्रिया सुनिश्चित करना है। लैब के काम करने से लोगों को जल्द न्याय मिलेगा। इसके साथ ही मधुबन लैब पर भी बोझ कम होगा। इससे पहले जिले में होने वाले अपराधों से संबंधित सैंपलों की जांच एफएसएल मधुबन में की जाती थी। वहां केस जमा करने और रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए समय और संसाधन दोनों की खपत हो रही थी। साथ ही जांच का अधिक भार होने के कारण रिपोर्ट आने में भी विलंब होता था। जिले में रीजनल लैब संचालित होने से पूरी जांच प्रक्रिया को तेज कर जल्द से जल्द नतीजे मिलेंगे।
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तीन माह से है रिपोर्ट का इंतजार
अप्रैल माह में खड़क मंगोली में तीन लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। तीनों की बिसरा रिपोर्ट अभी तक नहीं मिली है। करीब पांच माह बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट पुलिस को नहीं मिली है। इस कारण मौत के कारणों का पता नहीं चल पाया है।
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