प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने बताया कि शिक्षण कर्मचारियों के लिए कॅरिअर एडवांसमेंट स्कीम में वित्तीय उन्नयन और पदनाम में बदलाव का प्रावधान है। उनके अनुसार, यह व्यवस्था 2011 से लंबित थी, जिसे 2022 में फिर बहाल किया गया। वहीं, गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स से स्वीकृत पीपीएस व्यवस्था वर्ष 2020 से लंबित होने का दावा किया गया है।
नाईपर मोहाली के गैर-शिक्षण कर्मचारियों का पदोन्नति और कॅरिअर प्रगति से जुड़ी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन 21 दिन से जारी है। कर्मचारियों का कहना है कि संस्थान में तीन दशक तक सेवा देने के बावजूद कई कर्मचारी उसी पद से सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जिस पर उनकी नियुक्ति हुई थी। उन्होंने शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की सेवा शर्तों तथा कॅरिअर प्रगति में कथित अंतर को दूर करने की मांग की है।
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कर्मचारियों के अनुसार, नाईपर एसएएस नगर की स्थापना 1994 में एक सोसायटी के रूप में हुई थी। बाद में नाईपर अधिनियम, 1998 के तहत इसे स्वायत्त संस्थान का दर्जा मिला। संस्थान में शिक्षण और गैर-शिक्षण दोनों वर्गों की सेवाएं लागू नियमों और संस्थागत व्यवस्था के तहत संचालित होती हैं। ऐसे में सेवा शर्तों, लाभ और कॅरिअर प्रगति से जुड़े प्रावधानों के क्रियान्वयन में समानता होनी चाहिए। पारदर्शिता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
लंबे समय से कॅरिअर प्रगति का रास्ता स्पष्ट नहीं होने से गैर-शिक्षण कर्मचारियों में गहरा असंतोष है। तीन दशक की सेवा के बाद भी नियमित पदोन्नति का अवसर नहीं मिलना उनके लिए चिंता का विषय है। यह स्थिति कर्मचारियों के मनोबल को प्रभावित कर रही है।
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सेवा शर्तों में असमानता का आरोप
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने बताया कि शिक्षण कर्मचारियों के लिए कॅरिअर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) में वित्तीय उन्नयन और पदनाम में बदलाव का प्रावधान है। उनके अनुसार, यह व्यवस्था 2011 से लंबित थी, जिसे 2022 में फिर बहाल किया गया। वहीं, गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स से स्वीकृत पीपीएस व्यवस्था वर्ष 2020 से लंबित होने का दावा किया गया है। कर्मचारियों के मुताबिक, इस पीपीएस व्यवस्था में आठ वर्ष की सेवा के बाद वित्तीय उन्नयन का प्रावधान है।
अधिकारियों से हस्तक्षेप की अपील
प्रदर्शनकारियों ने निदेशक, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय और संबंधित सक्षम अधिकारियों से मामले में हस्तक्षेप कर समस्या का समाधान करने की मांग की। उन्होंने लागू नियमों के अनुसार निष्पक्ष, पारदर्शी और समान व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर तत्काल ध्यान दिया जाना चाहिए। वे समाधान होने तक अपना प्रदर्शन जारी रखने को प्रतिबद्ध हैं।