35 दिन से धरने पर बैठे कर्मचारी कर रहे हैं असहयोग आंदोलन
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। फेज-11 स्थित नाइपर में पर्सनल प्रमोशन स्कीम (पीपीएस) दोबारा लागू करने की मांग को लेकर गैर-शिक्षण कर्मचारियों का आंदोलन मंगलवार को तेज हो गया। 35 दिन से धरने पर बैठे कर्मचारी अब असहयोग आंदोलन में शामिल हो गए हैं। पांच कर्मचारियों ने मंगलवार से भूख हड़ताल शुरू कर दी है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से धरना देने के बावजूद मांग पर कोई फैसला नहीं होने के कारण उन्हें आंदोलन का रुख कड़ा करना पड़ा। नाइपर स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन (एनएसडब्ल्यूए) के अनुसार, पीपीएस वर्ष 2003 में लागू की गई थी। कर्मचारियों का कहना है कि इस योजना के तहत लंबे समय से सेवा दे रहे गैर-शिक्षण कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिलता था। वर्ष 2022 में योजना को रोक दिया गया। एसोसिएशन का आरोप है कि इसे बंद करने से पहले कर्मचारियों से कोई चर्चा नहीं की गई।
करीब 130 कर्मचारियों की पदोन्नति प्रभावित
एसोसिएशन के अनुसार पीपीएस बंद होने से करीब 130 गैर-शिक्षण कर्मचारियों की पदोन्नति प्रभावित हो रही है। कई कर्मचारी लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। कर्मचारियों की मांग है कि पहले से मंजूर पीपीएस को दोबारा लागू किया जाए। मांग को लेकर कर्मचारी पहले भी विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं। परिवारों के साथ दो बार कैंडल मार्च निकाला गया। सोमवार को रजिस्ट्रार, विभागाध्यक्षों और फैकल्टी सदस्यों के साथ बैठक हुई। इसके बाद निदेशक के साथ शाम चार बजे प्रस्तावित बैठक अंतिम समय पर स्थगित कर दी गई। एनएसडब्ल्यूए ने मंत्रालय के अधिकारियों और केंद्रीय मंत्री से भी पीपीएस बहाल करने की मांग की है। कर्मचारियों ने कहा कि मांग पर फैसला होने तक आंदोलन जारी रहेगा।