स्थानीय निकाय विभाग ने वीरवार को शहर के नए सेक्टरों के लोगों को बड़ी राहत दी। विभाग ने देर शाम नए सेक्टरों और दो गांवों को नगर निगम की सीमा में शामिल करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया।
नोटिफिकेशन के मुताबिक पूरी तरह विकसित सेक्टर 66, 67, 68, 69 निगम में आ जाएंगे। वहीं, विकसित किए जा रहे सेक्टर 76, 77, 78, 79, 80 को भी निगम में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, दो इंडस्ट्रियल सेक्टर 74 और 75 को भी निगम के दायरे में लाया गया है।
शहर के बीच स्थित दो गांव सोहाना और कुंभड़ा के लोगों को भी निगम की सीमा में शामिल किया गया है। हालांकि, इन दोनों गांवों में पिछले दिनों ही चुनाव से नई पंचायत का गठन हुआ है। अब पंचायतों पर निर्भर करेगा कि वे इसका समर्थन करेंगी या विरोध।
सेक्टर-65 तक पहले ही निगम की सीमा में थे। इसके अलावा सेक्टर 70-71 और इंडस्ट्रियल सेक्टर 72-73 भी निगम सीमा में आते थे। अब सेक्टर-80 तक सारा इलाका नगर निगम की सीमा में आ जाएगा। निगम के एसई बीडी सिंगला ने नोटिफिकेशन जारी करने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि निगम ने जो प्रस्ताव भेजा था, उसी आधार पर नोटिफिकेशन की गई है।
अब मांगे जाएंगे ऐतराज
नगर निगम की नई हदबंदी का नोटिफिकेशन जारी करने के बाद अब निगम इस पर लोगों से ऐतराज मांगेगा। ऐतराज दाखिल करने के लिए उन्हें पंद्रह से तीस दिनों का समय दिया जा सकता है।
नए सेक्टरों में से तो किसी को ऐतराज होने की संभावना नहीं है। सोहाना और कुंभड़ा गांवों से कोई ऐतराज दाखिल कर सकता है। पंचायत चुनाव से पहले गांववासियों ने चेतावनी दी थी कि अगर गांवों को निगम में शामिल करना है तो पंचायत चुनाव से पहले ही करें।
अगर चुनाव के बाद उन्हें निगम में शामिल किया गया तो वे अदालत जाएंगे। ऐतराजों का निपटारा करने के बाद हदबंदी का फाइनल नोटिफिकेशन होगा। उसके बाद वार्डबंदी की कवायद शुरू की जाएगी।
अदालत के आदेश के बाद जागा विभाग
नगर काउंसिल को जनवरी 2011 में निगम का दर्जा मिला था। उसके बाद से निगम की हदें नहीं बढ़ाईं। इसे लेकर एक पूर्व पार्षद ने केस कर दिया तो निगम का नोटिफिकेशन स्टे हो गया। मई 2012 में निगम फिर बहाल हुआ। उसके बाद निगम ने कई प्रस्ताव भेजे, पर निकाय विभाग ने हदबंदी नहीं की।
सितंबर में निकाय विभाग ने नगर काउंसिल की सीमा पर ही निगम की हदबंदी करके वार्डबंदी के लिए सर्वे शुरूकरा दिया गया। इसके विरोध में पूर्व पार्षद कुलजीत बेदी ने हाईकोर्ट की शरण ली।
अदालत ने बेदी को सात दिन में अपना प्रस्ताव निकाय विभाग को सौंपने के लिए कहा। विभागीय डायरेक्टर को पंद्रह दिनों में इस पर फैसला लेने के आदेश दिए गए थे। इसी बीच निगम ने नया प्रस्ताव बना कर भेजा, जिस पर नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया।
जन-प्रतिनिधि न होने से थी समस्या
नए सेक्टरों में जन-प्रतिनिधि न होने से काफी समस्या आ रही थी। ये सेक्टर गमाडा के अधीन होने के कारण सुनवाई नहीं होती थी। जन-प्रतिनिधि न होने के कारण कोई फार्म तसदीक नहीं हो पाता था। मैरिज, आर्म्स रजिस्ट्रेशन हो या बच्चों के फार्म भरने आदि सभी में परेशानी आती थी। लोग तहसील दफ्तर जाते थे तो उन्हें कहा जाता कि पार्षद या सरपंच से तसदीक करा कर लाओ। पर यहां न तो पार्षद हैं, न ही सरपंच।