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जीरकपुर-खरड़ में नया एसटीपी लगने तक नए प्रोजेक्ट नहीं शुरू होंगे

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मोहाली। खरड़ और जीरकपुर में नए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट नहीं शुरू हो पाएंगे। पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (पीपीसीबी) ने दोनों शहरों में जीरो अनट्रीटेड डिस्चार्ज को सुनिश्चित न कर पाने पर यह आदेश दिया है। पीपीसीबी लगातार दोनों शहरों की काउंसिल को घग्गर नदी में सीवेज डिस्चार्ज न किए जाने को सुनिश्चित करने को लेकर रिमाइंडर भेज रहा था। इन पर कोई उचित कार्रवाई न होते देख पीपीसीबी ने स्थानीय निकाय विभाग को नए सीवरेज ट्रीटमेंट (एसटीपी) लगने तक दोनों शहरों में नए प्रोजेक्ट्स शुरू करने पर रोक लगाने को कहा है।
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बता दें कि चंडीगढ़ के साथ सटे होने के चलते इन दोनों शहरों में लोग भूमि खरीदने और घर बनाने में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं। इन इलाकों में आबादी का भार पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। यहां बढ़ी आबादी के हिसाब से एसटीपी अभी नहीं बढ़ पाए हैं। अभी एक एसटीपी जीरकपुर और एक खरड़ में लगा है। ये मौजूदा जल प्रदूषण भार से निपटने में असमर्थ हैं क्योंकि इन दोनों शहरों में सीवरेज वेस्ट निकलने और ट्रीट होने में 17 एमएलडी का अंतर है।
एसटीपी की मौजूदा क्षमता काफी कम
जीरकपुर में स्थापित एसटीपी की क्षमता 17.3 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) है। वहीं, खरड़ के एसटीपी की क्षमता 11 एमएलडी है। मौजूदा समय में दोनों एसटीपी की क्षमता काफी कम है। जीरकपुर में 17 एमएलडी और खरड़ में 10 एमएलएडी के एसटीपी बनाने का काम चल रहा है।
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बिना एसटीपी बन रहे हैं कई प्रोजेक्ट
इलाके में कई प्रोजेक्ट में एसटीपी नहीं लगे हैं। इस कारण भी प्रशासन के एसटीपी पर बोझ बढ़ रहा है। अगर सभी प्रोजेक्ट्स में से निकलने वाला सीवरेज वेस्ट एसटीपी से ट्रीट करके डाला जाए तो यह समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। लोगों का कहना है कि इस बारे में प्रशासन को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
ओवरफ्लो होकर सड़कों पर बह रही गंदगी
दोनों शहर में सीवरेज सिस्टम की हालत बेहद खराब है। रोज कहीं न कहीं सीवरेज लाइन ब्लॉक होने की शिकायत आ ही जाती है। बरसात के दिनों में सीवरेज जाम होने की वजह से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही थी। शहर में जगह-जगह सीवरेज लाइनें ओवरफ्लो हो रही हैं। शहर का दौरा किया जाए तो अभी भी सीवरेज का पानी सड़कों पर बहता दिखाई दे जाएगा। लोगों का कहना है कि काउंसिल मुलाजिम सीवरेज लाइनों की ढंग से सफाई नहीं कर रहे हैं। इस कारण सीवरेज चोक हो रहे हैं। इतना ही नहीं, शहर में ड्रेन न होने के कारण बरसात का पानी भी सीवरेज लाइन में ही डाला जा रहा है। इस कारण सीवरेज सिस्टम पर लोड पड़ गया है।
कोट
स्थानीय निकाय विभाग, पंजाब के प्रमुख सचिव को एक पत्र लिखा था। इसमें कहा था कि जीरकपुर के लिए 17 एमएलडी और खरड़ के लिए 10 एमएलडी क्षमता का एक एसटीपी योजना के स्तर पर है। अभी यहां से अनट्रीटेड वाटर को प्राकृतिक नालों जैसे सुखना चो, सिंह नाला, जयंती की राव आदि में छोड़ा जा रहा है। इस कारण अंत में घग्गर नदी प्रदूषित हो रही है। मौजूदा समय में दोनों एसटीपी को अपग्रेड करने और नए प्लांट लगाने में कोई ज्यादा काम नहीं हुआ है। -करुणेश गर्ग, मेंबर सेक्रेटरी, पीपीसीबी
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