मोहाली। राज्य सरकार ने लोगों की सुविधा के लिए फेज 6 में करोड़ों रुपये की लागत से अति आधुनिक सुविधाओं वाला बस स्टैंड बनाया था। वहीं प्रशासन के ढीले रवैये के चलते यह प्रोजेक्ट कामयाब नहीं हो आया है। प्राइवेट बस ऑपरेटर नए बस स्टैंड तक बसें लेकर जाते तक नहीं हैं। बता दें कि ट्रांसपोर्ट विभाग ने खुद ही नोटिफिकेशन जारी कर फेज-8 के बस स्टैंड का स्टेटस खत्म किया था लेकिन अब विभाग ने पूरी तरह से आंखें बंद कर ली हैं।
इस कारण सवारियां मजबूरी में फेज-8 के खुले ग्राउंड में से बसें ले रही हैं। गमाडा भी अवैध तरीके से चल रहे बस अड्डे पर कुछ नहीं कर रहा है। इस मामले को लेकर पार्षद कुलजीत सिंह बेदी ने सरकार को पत्र लिखकर मांग की है कि नए बस स्टैंड को कामयाब बनाया जाए। जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार ने एयरपोर्ट की तर्ज पर मोहाली में इंटरस्टेट बस टर्मिनल बनाने का फैसला 2009 लिया था। बस स्टैंड बनकर 2011 में तैयार होना था लेकिन प्रोजेक्ट तय समय पर पूरा नहीं होने के बाद दिसम्बर 2016 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आधा-अधूरा बस स्टैंड शुरू कर दिया।
इसके बाद यह बस स्टैंड राजनीति शुरू हुई। प्राइवेट बस ऑपरेटर नए बीएस स्टैंड जाने को तैयार नहीं थे। उन्होंने सेहत मंत्री से मुलाकात की। इसके बाद बस वाले बसें सीधे फेज 8 के पुराने बस स्टेंड ले जाने शुरू हो गए। जब मामला मीडिया में गरमाया तो गमाडा ने फेज 8 पुराने बस स्टैंड को तोड़कर उस साइट पर तार लगा दी। वहीं बस ऑपरेटरों के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने गमाडा की खली पड़ी जगह को बस स्टैंड बना डाला।
बस स्टैंड के शीशे टूटने लगे, नहीं हो रही देखभाल
बस स्टैंड की हालत खराब हो गई है। वहां के शीशे टूटने लग पड़े हैं। लाइट तक जवाब दे रही हैं। बिल न भर भर पाने से कई बार बस स्टैंड का बिजली कनेक्शन तक कट चुका है। इस कारण रोजाना शाम को बस स्टैंड में अंधेरा छा जाता है जिसके चलते लोगों को परेशानी आती है।
बस स्टैंड कुर्क होने की लटकी तलवार
जानकारी के मुताबिक बस स्टैंड संभालने वाली कंपनी की आर्थिक हालात अच्छी नहीं है। कंपनी 15 लाख रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स नहीं भर पाई है। निगम कई बार बस स्टैंड चलाने वाली कंपनी को नोटिस भेज चुका है। निगम अधिकारियों का कहना है कि अगर प्रॉपर्टी टैक्स नहीं भरा तो बस स्टैंड को अटैच करने की तैयारी में है।
कंपनी प्रबंधकों पर दर्ज हो चुका है केस
जानकारी के मुताबिक बस स्टैंड बनाने वाली कंपनी के डायरेक्टर पर केस दर्ज हो चुका है। आरोप है कि प्रबंधकों ने इनवेस्टरों को तय वायदे के अनुसार दुकानों और शोरूमों का पेजेशन नहीं दिया।