पंचकूला। हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी पंचकूला द्वारा विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर अकादमी भवन के सभागार में भारत विभाजन की विभीषिका और परिणाम विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती को माल्यार्पण करके किया गया। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में अनेक प्रदेशों के विद्वान मौजूद रहे। संगोष्ठी तीन सत्रों में आयोजित की गई। प्रथम सत्र विभाजन की पृष्ठभूमि में डॉ. ज्ञानेश्वर खुराना पूर्व इतिहास विभाग अध्यक्ष कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने उपर्युक्त विषय पर सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किया। प्रथम सत्र की अध्यक्षता डॉ. कंवर चंद्रदीप सिंह इतिहास विभाग अध्यक्ष हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला द्वारा की गई। डॉ. कंवर चंद्रदीप सिंह ने भारत विभाजन के संदर्भ में तथ्य परक जानकारी देते हुए तत्कालीन स्थिति पर समीक्षा की। हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ. अग्निहोत्री ने बताया कि अंग्रेज जम्मू कश्मीर को पाकिस्तान में मिलना चाहते थे ताकि गिलगिट के रास्ते भारत का संपर्क टूट जाए। अग्निहोत्री ने अपने व्याख्यान में अंग्रेजों की कुटिल रणनीति पर व्यापक प्रकाश डाला।
भारत भूषण भारती ने इस विशेष आयोजन पर अकादमी को बधाई देकर कहा कि ऐसी संगोष्ठियों की परंपरा जारी रहनी चाहिए। इस सत्र में प्रख्यात पैनलिस्ट डॉ. दीनबंधु पांडेय पूर्व प्रोफेसर बीएचयू वाराणसी उत्तर प्रदेश द्वारा भारत की राजनैतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक और आध्यात्मिक स्थिति पर जानकारी प्रदान की गई।