मोहाली। नाबी (नेशनल एग्री फूड बॉयोटेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट) में राष्ट्रीय जीनोम संपादन और प्रशिक्षण केंद्र (एनजीईटीसी) और खाद्य और पोषण पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन हुआ। यह उद्धाटन पृथ्वी विज्ञान और विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया है।
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने नए और चुनौतीपूर्ण शोध करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने नाबी को भूख और कुपोषण की समस्याओं का समाधान करने और भारत में पोषण क्रांति लाने की सलाह दी। उन्होंने प्रमुख अनाज फसलों के बायोफोर्टिफिकेशन के क्षेत्र में अनुसंधान करके कुपोषण की समस्या को दूर करने के लिए संस्थान की ओर से किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। इसके अलावा डॉ. जितेंद्र सिंह ने सेब और आड़ू जैसे फलों में कटाई के बाद के नुकसान को कम करने की दिशा में संस्थान के प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि इस केंद्र में आधुनिक सुविधाएं होंगी। एनजीईटीसी युवा शोधकर्ताओं को फसलों में इसकी जानकारी और अनुप्रयोग के बारे में प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान करके उन्हें सशक्त बनाएगी। नाबी ने जीनोम एडिटिंग टूल का इस्तेमाल करने की क्षमता दिखाई है और जीनोम एडिटिंग टूल्स का विस्तार केले, मक्का, चावल, गेहूं, टमाटर और बाजरा सहित फसलों में किया जा सकेगा।
नाबी के कार्यकारी निदेशक प्रो. अश्विनी पारीक ने इस बात पर प्रकाश डाला कि नाबी कृषि-खाद्य और पोषण जैव प्रौद्योगिकी में उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान कार्यक्रम शुरू करने के मामले में महत्वपूर्ण प्रगति करने में सक्षम है। प्रो. पारीक ने कहा कि एनएबीआई देश में कुपोषण पर काबू पाने और गेहूं को पोषण के लिए बेहतर गुणवत्ता वाला स्रोत बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
आज से 9 जनवरी तक चलेगा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
इस दौरान नाबी के आयोजकों ने बताया कि खाद्य और पोषण सुरक्षा पर चार दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 6 से 9 जनवरी तक चलेगा। इसमें दुनिया भर के युवा शोधकर्ताओं और वैज्ञानिक विशेषज्ञों को इस बात पर विचार किया जाएगा। इसमें विभिन्न देशों के 500 पंजीकृत प्रतिभागी और 80 वक्ता हिस्सा ले रहे हैं।