चंडीगढ़। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण तमाम तैयारियों के बाद बुधवार को लोकसभा में बजट पेश करेंगी। यह मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी बजट होगा। ऐसे में बजट से हर सेक्टर की खास उम्मीदें जुड़ी हैं। चंडीगढ़ ने भी इस बार अब तक के सबसे बड़े बजट की मांग की है। बुधवार को स्पष्ट हो जाएगा कि चंडीगढ़ प्रशासन की झोली में कितने करोड़ रुपये आएंगे। यूटी प्रशासन ने वर्ष 2023-24 के लिए केंद्र सरकार से करीब 7000 करोड़ रुपये मांगे हैं। ये चंडीगढ़ के वर्तमान बजट से 1221 करोड़ रुपये ज्यादा है। प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि बड़े बजट की मांग इसलिए की गई है ताकि रुकी हुई परियोजनाओं और गांवों के विकास को गति दी जा सके। अतिरिक्त पैसा नगर निगम में शामिल हुए गांवों के विकास कार्य, कचरा निस्तारण प्लांट का कायाकल्प व प्रशासन की कुछ प्रमुख परियोजनाओं के लिए मांगा गया है। केंद्र सरकार ने एक फरवरी 2022 को वर्ष 2022-23 के लिए 5382.79 करोड़ रुपये चंडीगढ़ की झोली में डाले थे। इसमें रेवेन्यू हेड यानी वेतन, भत्ते व अन्य खर्चों के लिए 4843.46 करोड़ जबकि कैपिटल हेड यानी विकास कार्यों के लिए 539.33 करोड़ रुपये मिले। हालांकि प्रशासन ने 5836 करोड़ रुपये की मांग की थी। इसमें से 453.21 करोड़ के बजट पर कैंची चल गई लेकिन वर्ष 2023-24 के लिए प्रशासन ने करीब 7000 करोड़ रुपये मांगे हैं। एक अधिकारी ने बताया कि ये अब तक का सबसे बड़ा बजट है क्योंकि हर बार प्रशासन की तरफ से साढ़े पांच हजार से छह हजार करोड़ रुपयों के करीब की ही मांग की जाती है।
वर्ष 2022-23 के बजट का 90 फीसदी से ज्यादा खर्च
वित्त वर्ष 2022-23 का अब लगभग पूरा होने वाला है। इस वर्ष के लिए मिले बजट में से प्रशासन ने 90 फीसदी से ज्यादा बजट खर्च कर दिया है। यूटी प्रशासन का वर्तमान बजट 5779.11 करोड़ रुपये हैं। इसमें रेवेन्यू हेड यानी वेतन, भत्ते व अन्य खर्चों के लिए 5306.64 करोड़ जबकि कैपिटल हेड यानी विकास कार्यों के लिए 472.47 करोड़ रुपये मिले हैं। प्रशासन ने अब तक (एक अप्रैल 2022 से 20 जनवरी 2023) तक रेवेन्यू हेड में 4668.73 करोड़ (87.98 फीसदी) और कैपिटल हेड में 353.62 करोड़ (74.84 फीसदी) खर्चे हैं। वित्त वर्ष 2022-23 में प्रशासन को बजट में सबसे ज्यादा तनख्वाह, वेजेज, ग्रांट-इन-ऐड (जनरल), ग्रांट-इन-ऐड (वेतन) और सप्लाई-मटेरियल के लिए कुल 4741.68 करोड़ रुपये मिले हैं। प्रशासन ने इसमें से 4219.21 करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं। प्रशासन ने वेतन के बजट का 85.54 फीसदी, रिवार्ड का 84.83 फीसदी, रेंट रेट्स एंड टैक्सेज का 90.70, क्लोदिंग एंड टेंटेज का 90.78, ग्रांट-इन-ऐड (जनरल) का 96.24 फीसदी, सप्लाई व मटेरियल का 96.90 फीसदी, ग्रांट-इन-ऐड (सैलरी) का 77.52 फीसदी, माइनर वर्क का 90.06 फीसदी खर्च कर दिया है।
किस साल कितना बजट मिला
वर्ष मांग बजट मिला
2015-16 4229 करोड़ 3543 करोड़
2016-17 5489 करोड़ 3937.47 करोड़
2017-18 6151 करोड़ 4312.40 करोड़
2018-19 5908 करोड़ 4511.91 करोड़
2019-20 5218 करोड़ 4753.12 करोड़
2020-21 5300 करोड़ 5138.10 करोड़
2021-22 5670.31 करोड़ 5186.12 करोड़
2022-23 5836 करोड़ 5382.79 करोड़