मोर्चे के नेता बोले, हमने नहीं बुलाया था
कहा, एसजीपीसी 328 लापता स्वरूपों का मसला सुलझाए
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। एसजीपीसी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी की गाड़ी पर हमले की घटना के बाद कौमी इंसाफ मोर्चा और एसजीपीसी प्रधान के बीच नया विवाद शुरू हो गया है। धामी ने जहां मोरचा के नेताओं की ओर से धरनास्थल पर बुलाकर ऐसा बर्ताव किए जाने पर अफसोस जाहिर किया था, वहीं कौमी इंसाफ मोर्चा के नेताओं का कहना है कि उन्होंने धामी को नहीं बुलाया था।
बंदी सिंहों की रिहाई को लेकर चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर कौमी इंसाफ मोर्चे की ओर से शुरू किए पक्के धरने में बुधवार को एसजीपीसी अध्यक्ष धामी ने भी शिरकत की थी। उनका कहना था कि मोर्चे के नेताओं ने उनके घर आकर, धरना स्थल का दौरा करने का आमंत्रण दिया था। दूसरी ओर, मोर्चे के नेताओं ने कहा है कि धामी झूठ बोल रहे हैं। उन्हें कोई निमंत्रण नहीं दिया गया था और न ही धामी ने आगमन से पहले मोर्चे के प्रबंधकों से कोई बात ही की थी।
मोर्चे के नेता बलविंदर सिंह ने बताया कि उन्हें धामी की तरफ से गुरसेवक सिंह नामक व्यक्ति का फोन आया था कि एसजीपीसी अध्यक्ष धरना स्थल पर आना चाहते हैं। बलविंदर सिंह ने कहा कि इस बारे में उन्होंने मोर्चे के बाकी नेताओं को जानकारी दी तो सभी ने यह कहा कि एसजीपीसी अध्यक्ष से बिनती की जाए कि वह मोर्चे की चार प्रमुख मांगों में से एक, जो सीधे तौर पर एसजीपीसी से जुड़ा है, को हल करके ही धरनास्थल पर आएं। उन्होंने कहा कि यह मसला श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 लापता स्वरूपों का है, जिसके बारे में श्री अकाल तख्त के कार्यकारी जत्थेदार भी एसजीपीसी को हिदायत जारी कर चुके हैं, लेकिन यह मसला अब तक लंबित है। इसके अलावा अन्य तीन मांगों में, बंदी सिंहों की रिहाई, जिसका बादल सरकार ने विरोध किया गया, बेअदबी की घटनाएं और बहिबल कलां व कोटकपूरा गोलीकांड की घटनाएं, जोकि बादल सरकार के समय हुईं और धामी की नियुक्ति भी बादलों द्वारा ही की गई, इसलिए धामी पहले लापता स्वरूपों की मसले का हल करें।