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जच्चा-बच्चा वार्ड : एक बेड पर दो नवजात और दो माताएं, संक्रमण का खतरा

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मोहाली। फेज-6 एम्स के जच्चा-बच्चा वार्ड में माताओं और नवजातों की हालत चिंताजनक है। गायनी वार्ड में भारी कमी के चलते एक ही बेड पर दो-दो महिलाओं और उनके शिशुओं को रखा जा रहा है। इससे संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। वार्ड में डिलीवरी के तुरंत बाद ही मरीजों को पीडियाट्रिक रूम में भेज दिया जाता है, जहां सात बेड की क्षमता वाले कमरे में लगभग 12 से 15 मरीज रखे जा रहे हैं। साथ में उनके परिजन भी होते हैं, तो भीड़ हो जाती है। नवजातों को इंफेक्शन का डर सताता रहता है।
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अस्पताल सूत्रों के अनुसार, हर दिन औसतन 10 से 15 डिलीवरी हो रही हैं, जबकि वार्ड में कुल 36 बेड ही हैं। ऐसे में स्टाफ के सामने मरीजों को एडजस्ट करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। कुराली से आई सुषमा बताती हैं कि सुबह सात बजे के करीब उनकी डिलीवरी हुई और 11 बजे उन्हें पीडियाट्रिक वॉर्ड में भेज दिया गया। कुछ देर बाद एक और महिला को उसी बेड पर भेज दिया गया उसकी भी आज ही बेटी हुई थी। इतनी तकलीफ के बाद भी हमें बस यही कहा गया कि ‘एडजस्ट कर लीजिए’। मना करने पर नर्स ने बदतमीजी भी की। बलौंगी से आई चंदा बताती हैं कि बैठने-लेटने में बहुत दिक्कत आती है। एक ही बेड दो मरीज दो नवजात और तीमारदार बैठते हैं। एक तो वैसे ही दर्द से उठे होते हैं ऊपर से आराम भी नहीं मिलता।

संक्रमण और सुरक्षा पर सवाल
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डिलीवरी के बाद मां और नवजात शिशु को अलग और स्वच्छ माहौल में रखना जरूरी होता है, ताकि संक्रमण से बचाव हो सके। एम्स में मौजूदा हालात में वायरल इन्फेक्शन और स्किन इन्फेक्शन जैसे खतरे बढ़ गए हैं।
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एम्स प्रशासन का पक्ष
- संस्थान को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जनसंख्या बहुत ज्यादा है, संसाधन सीमित हैं। हम किसी मरीज को मना नहीं कर सकते। जितने बेड हैं, उतने ही दे सकते हैं। जो स्पेशल केयर यूनिट बननी थी, वह अभी शुरू नहीं हुई है। उसके लिए आदेश लंबित हैं, लेकिन हमसे जितना हो सकता है, कर रहे हैं। - डॉ. भवनीत भारती, डायरेक्टर प्रिंसिपल, एम्स मोहाली




अस्पताल की क्षमता बनाम वास्तविक दबाव
श्रेणी
अनुमानित संख्या / विवरण
टिप्पणी
प्रति माह डिलीवरी 400-500
औसतन, आंकड़े अनुमानित हैं
रोजाना डिलीवर 10-15
लगभग, वास्तविक संख्या अलग हो सकती है
डिलीवरी आवृत्ति लगभग हर दो घंटे में एक डिलीवरी औसतन
गायनी ओपीडी (वर्किंग डे) लगभग 250
औसतन
पोस्ट डिलीवरी गायनी वार्ड बेड 40
स्थिति क्षमता से अधिक
वार्ड में डबल ऑक्युपेंसी अक्सर बेड की कमी के चलते कई बार दो मरीज एक ही बेड पर


फाइलों में 52 बेड, हकीकत में इंतजार
स्वास्थ्य विभाग की योजना के मुताबिक, जच्चा-बच्चा भवन की चौथी मंजिल पर नया पीडियाट्रिक वार्ड इस साल के मध्य तक शुरू होना था। कुल 52 बेड की क्षमता प्रस्तावित थी, जिसमें 12 अतिरिक्त बेड और 5 आईसीयू बेड शामिल होने थे। योजना के अनुसार, यह वार्ड जनवरी में शुरू होना था, फिर मार्च तक स्थगित किया गया, उसके बाद अगस्त की तारीख दी गई, लेकिन अब भी वार्ड शुरू नहीं हुआ है और पूरा होने की उम्मीद अस्पष्ट बनी हुई है। इस स्थिति ने वार्ड में बेड और संसाधनों की कमी को और बढ़ा दिया है, जिससे माताओं और नवजातों के लिए जोखिम बढ़ गया है।
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