मोहाली। जिले के थानों में जब्त सैकड़ों वाहनों की नीलामी का रास्ता तो साफ हो गया है लेकिन शहर के थानों की हालत बहुत खराब है। शहर के थानों को जारी लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है। अदालत के आदेश के बाद मालिकों को वाहन वापस लेने के लिए महज 15 दिन का ही समय दिया गया है। इसके बाद इन वाहनों को सरकारी नियमों के अनुसार नीलाम कर दिया जाएगा। इन वाहनों को मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 207, पुलिस एक्ट की धारा 25 और सीआरपीसी की धारा 102 के तहत पुलिस ने कब्जे में लिए थे। इनमें मोटरसाइकिल, कारें और स्कूटियां शामिल हैं। यह कदम थानों में जगह की कमी को दूर करने और कबाड़ बन चुके वाहनों को हटाने की दिशा में लिए गए हैं।
इस सूची में मोहाली शहर के थाने शामिल ही नहीं हैं। शहर के पुलिस स्टेशनों की स्थिति सबसे खराब है। फेज-1, फेज-11, बलौंगी, मटौर, सोहाना और फेज-8 में फुटपाथ और सड़क किनारे तक जब्त वाहनों की लाइन लगी हुई है। फेज-1 और 11 में पार्क के बाहर फुटपाथ पर वाहनों ने पूरा मार्ग घेर रखा है, जिससे आम लोगों को परेशानी होती है। सोहाना और बलौंगी थानों में भी लंबे समय से वाहनों के ढेर लगे हैं।
थाना
जब्त वाहनों की संख्या
ढकोली
90
डेराबस्सी
98
मुल्लांपुर
51
नयागांव
26
कुराली
24
माजरी
25
लालड़ू
27
कुल 341
जगह नहीं, रखरखाव नहीं, दुर्घटना का खतरा अलग
शहर के पुलिस स्टेशन पहले ही जगह की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में महीनों तक खड़े रहने वाले जब्त वाहन स्टेशनों की कार्यक्षमता को प्रभावित कर रहे हैं। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि फेज-8 और बलौंगी थाने में जब्त वाहनों में आग लगने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। मौसम के प्रभाव, तेज धूप, बारिश और समय-समय पर शरारती तत्वों के कारण ये वाहन पूरी तरह कंडम हो चुके हैं। पुलिस स्टेशनों की सीमित जगह होने के चलते ये वाहन सुरक्षा के लिहाज से भी खतरा बनते जा रहे हैं। वाहन इतने खराब हो चुके हैं कि नीलामी तक इनके योग्य नहीं रहते, जिससे सरकारी राजस्व का भी नुकसान होता है।
जो सूची जारी की गई है, उसमें सिर्फ वही थाने शामिल हैं जिन्होंने अदालत से नीलामी के लिए आदेश ले लिए हैं। मोहाली शहर के थानों ने अभी तक ये ऑर्डर नहीं लिए, इसलिए उनका नाम सूची में नहीं है। जैसे ही वे भी अदालत से अनुमति ले लेंगे, वहां भी नीलामी की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी जाएगी। -नवनीत सिंह माहल, एसपी ट्रैफिक, मोहाली