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Mohali : तरनतारन फर्जी एनकाउंटर मामले में डीएसपी और एसएचओ को 10-10 साल की कैद, 32 साल पुराना है मामला

Sun, 31 Mar 2024 05:26 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मोहाली

सार

सीबीआई की अदालत ने एसएचओ अमरजीत सिंह को दो धाराओं में 10 साल की सजा और 2 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना न भरने पर दो साल की सजा भुगतनी होगी। बता दें कि डीएसपी अशोक कुमार की ट्रायल के दौरान मौत हो गई थी।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वर्ष 1992 में पंजाब के तरनतारन में हुए फर्जी एनकाउंटर के मामले के 32 साल बाद सीबीआई की अदालत ने तत्कालीन एसएचओ अमरजीत सिंह और डीएसपी अशोक कुमार को दोषी करार दिया है। सीबीआई की अदालत ने एसएचओ अमरजीत सिंह को दो धाराओं में 10 साल की सजा और 2 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना न भरने पर दो साल की सजा भुगतनी होगी। बता दें कि डीएसपी अशोक कुमार की ट्रायल के दौरान मौत हो गई थी।

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सीबीआई की अदालत में सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने बताया कि वर्ष1992 में तत्कालीन एसएचओ अमरजीत सिंह और उस समय के डीएसपी अशोक कुमार के नेतृत्व में गांव झबाल में आई पुलिस टीम ने राजवंत कौर और उनकी सास गुरबचन सिंह को घर से ही उठा लिया। शाम को 20 लोगों की पुलिस पार्टी ने घर से बलविंदर सिंह के साथ ही 6 व्यक्तियों और तीन महिलाओं को घर से उठा लिया। इसके बाद उनकी पत्नी को छह दिन बाद छोड़ दिया गया और सास को चार दिन बाद छोड़ दिया गया। इस मामले में बलविंदर सिंह को नहीं छोड़ा गया। परिवार ने इसके बाद अलग-अलग अफसरों और विभागों से संपर्क किया।

अलग-अलग थानों में अवैध ढंग से रखा
पुलिस इस बीच बलविंदर सिंह को अलग-अलग थानों में अवैध ढंग से रखती रही। 4 से 19 सितंबर 1992 तक गांव के अलग-अलग लोग उसे कई थानों में मिलकर कपड़े और खाना देते रहे। 19 सितंबर 1992के बाद बलिवंदर सिंह लापता हो गया। 
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1997 में सीबीआई ने दर्ज की थी एफआईआर
लापता होने के बाद बलविंदर की पत्नी राजवंत कौर की ओर से 1995 में की गई एक याचिका के बाद जांच सीबीआई को दी गई। सीबीआई ने 1997 में उक्त दो आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।

15 ने दी गवाही
वर्ष 1999 में केस का चालान पेश किया गया। केस में पहली गवाही 2001 में हुई। उसके बाद 2002 से 2022 तक उच्च अदालतों में स्टे रहा। इस कारण सीबीआई की ओर से रखे 31 गवाहों में से 15 गवाहों की गवाही हुई। वहीं, अब इस केस में सीबीआई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए 10 साल कैद और दो लाख रुपये जुर्माना सुनाया।

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